कंगाल पाकिस्तान बलूचों के खिलाफ आर-पार के मूड में रेको डिक खदान में निवेश कर चुकी कंपनियों का दबाव

इस्लामाबाद, 10 फरवरी कंगाल पाकिस्तान अपनी डूबती अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए बलूचिस्तान का सौदा कर रहा है। पाकिस्तान वहां की बेशकीमती रेको डिक खदान को दूसरे देशों को सौंपने का पूरा प्लान तैयार कर चुका है। बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के हमलों से डरी शहबाज शरीफ सरकार ने अब एक नई चाल चली है।
पाकिस्तानी सरकार ने अमेरिका और कनाडा को खुश करने के लिए बलूचिस्तान में एक ‘स्पेशल फोर्स’ तैनात करने और इंटेलिजेंस नेटवर्क को मजबूत करने का फैसला किया है। मामला तब गरमाया, जब कनाडा की कंपनी बैरिक माइनिंग कॉर्पोरेशन ने पाकिस्तान को चेतावनी दे दी।
दरअसल कनाडाई कंपनी ने साफ कहा कि वहां अरबों डॉलर के रेको डिक प्रोजेक्ट की सुरक्षा समीक्षा तुरंत शुरू करेगी। बता दें कि हाल ही में बीएलए की ओर से किए गए भीषण हमलों में 36 नागरिक और 22 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे गए। इन हमलों से विदेशी निवेशकों को डर है कि उनका पैसा बलूचिस्तान में डूब सकता है। इतना ही उन्हें अपने नागरिकों की जान का जोखिम भी दिख रहा है।
ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में प्रोजेक्ट वॉल्ट के तहत रेको डिक में 1.3 अरब डॉलर के निवेश का ऐलान किया है। भिखारी पाकिस्तान के लिए इतनी बड़ी रकम किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है। डॉलर की इस बारिश के बीच बीएलए न सिर्फ चट्टान बनकर खड़ा हो गया है बल्कि वहां पाकिस्तानी आर्मी के बेस तक पर हमले कर रहा है। बीएलए ने अपने इरादे साफ कर दिए है कि अब बलूचिस्तान के संसाधनों की लूट किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगी।
दूसरी ओर निवेशकों को रोकने के लिए बलूचिस्तान के सीएम सरफराज बुगती के सलाहकार शाहिद रिंद ने बताया कि सरकार अब आर-पार के मूड में है। खनिज संपन्न इलाकों की सुरक्षा के लिए अलग से फ्रंटियर कोर बनेगी। उन्होंने कहा कि ईरान और अफगानिस्तान से लगी सीमाओं की सुरक्षा बढ़ाई जाएगी ताकि विद्रोहियों को रोका जा सके। इसके अलावा खुफिया तंत्र को भी पहले से ज्यादा मजबूत किया जाएगा।
रेको डिक दुनिया की सबसे बड़ी तांबे और सोने की खदानों में गिनी जाती है। इसमें 50 फीसदी हिस्सेदारी बैरिक गोल्ड की और 25 फीसदी पाकिस्तान सरकार और 25 फीसदी बलूचिस्तान सरकार की है। 2028 तक यहां से सोना निकलना शुरू होने की उम्मीद है। एक ओर जहां पाकिस्तान इस प्रोजेक्ट को अपनी तकदीर बदलने वाला प्रोजेक्ट मानता है। वहीं दूसरी ओर बलूचों के लिए यह उनकी मातृभूमि की लूट है।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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