एसआईआर के दौरान हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, डीजीपी से मांगा व्यक्तिगत हलफनामा…

पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) ड्यूटी के दौरान चुनाव आयोग के अधिकारियों के साथ कथित हिंसा और धमकियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को व्यक्तिगत रूप से हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, चुनाव आयोग द्वारा दाखिल हलफनामे पर जवाब न देने को लेकर डीजीपी को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है।
अदालत ने यह निर्देश उस समय दिया, जब केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने पीठ का ध्यान चुनाव आयोग के हलफनामे की ओर दिलाया। इस हलफनामे में पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान गंभीर अनियमितताओं, धमकियों और हिंसा के आरोप लगाए गए हैं। आयोग ने दावा किया है कि राज्य में अन्य राज्यों की तुलना में भय और दबाव का माहौल कहीं अधिक है, जिससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हो रही है। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि चुनाव आयोग के अनुसार राज्य में डराने-धमकाने, बाधा डालने और भ्रामक सूचनाएं फैलाने की घटनाएं सामने आई हैं। हलफनामे में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी भड़काऊ भाषण देने और भय का वातावरण बनाने के आरोप लगाए गए हैं। आयोग का कहना है कि इस तरह के बयानों से जमीनी स्तर पर काम कर रहे चुनाव अधिकारियों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।
चुनाव आयोग ने अपनी शिकायत में यह भी उल्लेख किया है कि पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में बड़ी संख्या में फॉर्म-7 जलाए गए। इसके अलावा, पंचायत भवनों में सुनवाई के लिए पहुंचे बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) के साथ हिंसा की घटनाएं हुईं। आयोग के अनुसार, कई अधिकारियों को लोकतांत्रिक दायित्व निभाते समय अपनी जान का खतरा महसूस हुआ, जिससे वे भय के साए में काम करने को मजबूर हुए।
सुप्रीम कोर्ट ने इन आरोपों को गंभीर मानते हुए राज्य पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि चुनाव जैसी संवैधानिक प्रक्रिया में लगे अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य का दायित्व है। यदि इस दायित्व में चूक हुई है, तो इसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
पीठ ने स्पष्ट किया कि डीजीपी को व्यक्तिगत रूप से यह बताना होगा कि चुनाव आयोग के आरोपों पर अब तक क्या कार्रवाई की गई और अधिकारियों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए। अदालत ने संकेत दिए कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आगे और सख्त निर्देश भी दिए जा सकते हैं। अब इस मामले में राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन के जवाब पर सबकी नजर टिकी हुई है।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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