सरकारी खर्च से पावर सेक्टर में तेजी, निजी उद्योग अब भी सुस्त

नई दिल्ली, 27 फरवरी देश में पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) की रफ्तार इस समय दो अलग तस्वीरें पेश कर रही है। एक ओर पावर ट्रांसमिशन से जुड़ी हाई वोल्टेज कंपनियां रिकॉर्ड प्रदर्शन कर रही हैं, वहीं गैर-विद्युत औद्योगिक कंपनियों की चाल अब भी धीमी बनी हुई है। एक रिपोर्ट के अनुसार ट्रांसमिशन और वितरण कंपनियों के नए ऑर्डर में सालाना आधार पर 33 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि बिक्री 39 प्रतिशत बढ़ी है। इन कंपनियों का मुनाफा मार्जिन बढ़कर 20.3 प्रतिशत पर पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष से 5.4 प्रतिशत अधिक है। सरकार ने 2022 से 2032 के बीच ट्रांसमिशन क्षेत्र में 9.15 लाख करोड़ रुपये निवेश की योजना बनाई है। इसके तहत 8 से 10 बड़े हाई वोल्टेज ट्रांसमिशन कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे। तीन कॉरिडोर के लिए उपकरणों का काम पहले ही तय हो चुका है। अनुमान है कि 2027 से नए ऑर्डर में और तेजी आएगी तथा 2030 तक मांग मजबूत बनी रह सकती है। वित्त वर्ष 2027 के बजट में 12.2 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत खर्च का प्रावधान किया गया है, जो पहले के अनुमान से 12 प्रतिशत अधिक है। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार फैक्ट्रियों की क्षमता उपयोग दर 77.7 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो निजी निवेश के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है। हालांकि गैर-बिजली औद्योगिक कंपनियों की बिक्री में सिर्फ 9 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और उनका मुनाफा मार्जिन घटकर 11.7 प्रतिशत रह गया है। नए ऑर्डर में 26 प्रतिशत की बढ़त जरूर दर्ज की गई है, जो धातु, तेल-गैस, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिक वाहन और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों से आई है। इसके बावजूद पारंपरिक औद्योगिक निवेश में व्यापक तेजी अभी बाकी है।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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