घुसपैठ और तस्करी पर लगाम लगाने भारत-बांग्लादेश सीमा पर छोड़े जाएंगे सांप-मगरमच्छ!
-175 किलोमीटर नदी और दलदली इलाका, सामान्य बाड़ लगाना संभव नहीं

नई दिल्ली, भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर घुसपैठ और तस्करी पर लगाम कसने पारंपरिक बाड़ और टेक्नोलॉजी के अलावा प्रकृति का खतरनाक हथियार इस्तेमाल करने की तैयारी चल रही है। खबर है कि बीएसएफ ने अपने फील्ड यूनिट्स को निर्देश दिया है कि वे नदी और दलदली इलाकों में सांप और मगरमच्छ जैसे सरीसृपों के इस्तेमाल की संभावनाओं का अध्ययन करें। भारत-बांग्लादेश की 4,096 किलोमीटर लंबी सीमा में करीब 175 किलोमीटर नदी और दलदली इलाका है, जहां बाढ़ और भौगोलिक स्थिति के कारण सामान्य बाड़ लगाना संभव नहीं होता।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे में बीएसएफ अब प्रकृति को ही सुरक्षा का हथियार बनाने की सोच रही है। माना जा रहा है कि अगर यह योजना लागू होती है, तो घुसपैठियों के लिए सीमा पार करना पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक हो सकता है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों के बाद यह विचार सामने आया है। 26 मार्च को बीएसएफ मुख्यालय से भेजे गए एक आंतरिक संदेश में कहा गया है कि जिन नदी वाले इलाकों में बाड़ लगाना संभव नहीं है, वहां ‘प्राकृतिक अवरोध’ के तौर पर सांप और मगरमच्छ जैसे जीवों का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, फिलहाल यह योजना केवल चर्चा और व्यवहार्यता जांच के स्तर पर है, इसे लागू करने का कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
बता दें इस साल फरवरी में दिल्ली स्थित बीएसएफ मुख्यालय में हुई बैठक के बाद यह कम्युनिकेशन जारी किया गया। संदेश में सीमा चौकियों को ‘डार्क जोन’ के रूप में चिन्हित करने और वहां रहने वाले गांववालों के खिलाफ दर्ज मामलों की रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक बीएसएफ के एक अधिकारी ने साफ किया कि अभी यह सिर्फ चर्चा का विषय है। अभी तक सांप-मगरमच्छ तैनात करने का कोई आदेश नहीं दिया गया है। सिर्फ संभावना तलाशने को कहा है। इसमें कई चुनौतियां हैं…सरीसृपों को कहां से लाया जाए, उनका रखरखाव कैसे हो और नदी किनारे रहने वाले स्थानीय लोगों पर इसका क्या असर पड़ेगा।
रिपोर्ट के मुताबिक अगर यह योजना लागू हुई तो घुसपैठिए और तस्करों के लिए भारत में घुसने का ख्याल आते ही वह कांप जाएंगे। नदी के पानी में मगरमच्छ और घने जंगलों में जहरीले सांप है…यह सोचकर ही कोई भी गैरकानूनी तरीके से सीमा पार करने से पहले कई बार सोचेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि नदी वाले इलाकों में जहां फेंसिंग नहीं लग पाती, वहां प्राकृतिक बाधाएं काफी प्रभावी साबित हो सकती हैं, लेकिन साथ ही यह भी चिंता जताई कि बाढ़ के समय ये सरीसृप दोनों तरफ के गांवों के लिए खतरा बन सकते हैं।
बीएसएफ अधिकारी मानते हैं कि सांप और मगरमच्छ तैनात करना आसान नहीं होगा। इनकी खरीद, रखरखाव, प्रजनन और स्थानीय पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखना होगा। साथ ही बाढ़ के मौसम में इनके गांवों में घुस आने का खतरा भी बना रहेगा। फिलहाल यह प्रस्ताव चर्चा के चरण में है। बीएसएफ पूर्वी कमांड को डार्क जोन की मैपिंग करने और रिपोर्ट देने को कहा गया है।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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