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अमेरिका-ईरान शांति वार्ता से पहले राष्ट्रपति ट्रंप का कड़ा अल्टीमेटम

अमेरिका-ईरान शांति वार्ता से पहले राष्ट्रपति ट्रंप का कड़ा अल्टीमेटम

-कहा- डील नाकाम हुई तो ईरान पर होगा अब तक का सबसे घातक सैन्य हमला

वॉशिंगटन, अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में होने वाली महत्वपूर्ण शांति वार्ता से ठीक पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को विनाशकारी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है। न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यदि अगले 24 घंटों के भीतर बातचीत किसी ठोस समझौते पर नहीं पहुंचती है, तो अमेरिका अपने ‘सबसे खतरनाक’ हथियारों का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी जहाजों पर अब तक का सबसे आधुनिक और मारक गोला-बारूद लोड कर दिया गया है। ट्रंप के अनुसार, अमेरिका पश्चिम एशिया में अपनी रणनीतिक स्थिति को मजबूत कर रहा है और यह मिलिट्री बिल्ड-अप किसी भी बड़े संघर्ष को पूरी तरह खत्म करने की क्षमता रखता है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उनकी बातचीत की ईमानदारी पर गहरा संदेह व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि ईरानी पक्ष एक ओर परमाणु हथियारों को खत्म करने की बात करता है और दूसरी ओर यूरेनियम एनरिचमेंट को जारी रखने के बयान देता है। ट्रंप ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अमेरिका ऐसे लोगों के साथ डील कर रहा है जिनकी सच्चाई का भरोसा नहीं किया जा सकता। इस बीच, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए पाकिस्तान के लिए रवाना हो चुके हैं। इस डेलिगेशन में ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ भी शामिल हैं, जो ईरान के साथ दो सप्ताह के अस्थाई युद्धविराम को स्थाई शांति में बदलने की कोशिश करेंगे।

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट के अनुसार, यह बैठक पश्चिम एशिया में पिछले एक महीने से चल रहे भीषण संघर्ष को समाप्त करने के लिए अंतिम अवसर के रूप में देखी जा रही है। उपराष्ट्रपति वेंस ने प्रस्थान से पूर्व कहा कि अमेरिका खुले मन से बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन यदि ईरान ने ‘खेल’ खेलने या समय बर्बाद करने की कोशिश की, तो उसे बहुत सख्त जवाब मिलेगा। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जानकारों का मानना है कि ट्रंप का यह आक्रामक रुख ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इस्लामाबाद पर टिकी हैं, क्योंकि आगामी कुछ घंटों का घटनाक्रम यह तय करेगा कि क्षेत्र शांति की ओर बढ़ेगा या फिर एक बड़े युद्ध की आग में झुलसेगा।

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