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पापा की गोद

पापा की गोद

पापा की गोद में बैठा मैं,
दुनिया लगती प्यारी।
हाथों में उनके जादू है,
मुस्कान है सबसे न्यारी।

छोटी-छोटी बातें मेरी,
ध्यान से वो सुनते हैं।
गिर जाऊँ अगर कहीं भी मैं,
आकर तुरंत ही चुनते हैं।

कंधे पर सिर रख दूँ जब,
नींद मुझे आ जाती है।
पापा की ममता छूकर,
हर चिंता दूर हो जाती है।

मेरे छोटे-छोटे सपनों को,
पंख वही लगाते हैं।
मेरे हर डर, हर आँसू को,
हँसकर दूर भगाते हैं।

पापा मेरे सबसे अच्छे,
दोस्त भी और सहारे।
उनके संग ये बचपन मेरा,
लगता है जग से न्यारे।

-डॉ. सत्यवान सौरभ

सियासी मियार की रीपोर्ट