गुवाहाटी हाई कोर्ट से कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को लगा बड़ा झटका, मुख्यमंत्री की पत्नी से जुड़े मामले में अग्रिम जमानत याचिका हुई खारिज
गुवाहाटी, 25 अप्रैल। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुयान शर्मा द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर के मामले में कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा को कानूनी मोर्चे पर बड़ी विफलता हाथ लगी है। गुवाहाटी हाई कोर्ट के जस्टिस पार्थिवज्योति सैकिया की एकल पीठ ने शुक्रवार को खेड़ा की अग्रिम जमानत अर्जी को खारिज कर दिया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 21 अप्रैल को अपना फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे आज सुनाया गया। इस फैसले के बाद अब पवन खेड़ा पर गिरफ्तारी का खतरा मंडराने लगा है, जिससे कांग्रेस खेमे में हलचल तेज हो गई है।
सुनवाई के दौरान पवन खेड़ा की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि यह पूरा मामला राजनीति से प्रेरित है और चुनावों को देखते हुए दुर्भावनापूर्ण तरीके से दर्ज किया गया है। उन्होंने तर्क दिया कि खेड़ा के भागने का कोई खतरा नहीं है, इसलिए हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं है। दूसरी ओर, असम के एडवोकेट जनरल देवजीत लोन सैकिया ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यह मामला केवल मानहानि का नहीं, बल्कि धोखाधड़ी और दस्तावेजों की जालसाजी जैसे गंभीर अपराधों से जुड़ा है। सरकार का तर्क है कि झूठे दस्तावेज तैयार करने के आरोपों की गहराई से जांच के लिए हिरासत में पूछताछ अनिवार्य है।
यह पूरा विवाद पवन खेड़ा के उस बयान से शुरू हुआ था, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री की पत्नी के पास कथित तौर पर एक से अधिक पासपोर्ट होने और जमीन से जुड़े दस्तावेजों में गड़बड़ी के आरोप लगाए थे। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी खेड़ा को राहत देने से इनकार कर दिया था और स्पष्ट किया था कि निचली अदालत या हाई कोर्ट गुण-दोष के आधार पर फैसला लेने के लिए स्वतंत्र है। गुवाहाटी क्राइम ब्रांच में दर्ज इस एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की धोखाधड़ी और जालसाजी जैसी कई संगीन धाराएं शामिल हैं। अब जमानत खारिज होने के बाद असम पुलिस की अगली कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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