आरोप लगाया कि बिहार विधानसभा चुनाव में हार की आशंका के बीच, मतदान के दिन तक बैंक खुलवाकर मतदाताओं को प्रभावित करने के उद्देश्य से महिलाओं और जीविका दीदियों के
आरोप लगाया कि बिहार विधानसभा चुनाव में हार की आशंका के बीच, मतदान के दिन तक बैंक खुलवाकर मतदाताओं को प्रभावित करने के उद्देश्य से महिलाओं और जीविका दीदियों के खातों में 10 हजार रुपये भेजे गए। उन्होंने कहा कि महिलाओं को कथित रूप से डराया- धमकाया गया और यह संदेश दिया गया कि यदि वे सत्तारूढ़ गठबंधन को वोट नहीं देंगी तो उनके खातों से पैसे वापस ले लिए जाएंगे।उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान महिलाओं को प्रलोभन दिया गया कि उन्हें कुल दो लाख रुपये की सहायता दी जाएगी, जिसमें आगे की किश्त चुनाव के बाद दी जाएगी,लेकिन छह महीने बीत जाने के बाद भी यह वादा पूरा नहीं किया गया।
राजद नेता श्री यादव ने कहा कि इस योजना में पहले से पंजीकृत लगभग 18 लाख महिलाओं को पहली किश्त नहीं मिली, जबकि एक करोड़ 81 लाख जीविका दीदियों एवं महिलाओं को दूसरी किश्त का इंतजार है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति सरकार की विफलता और वादाखिलाफी को दर्शाती है।
श्री यादव ने राज्य की वित्तीय स्थिति पर भी चिंता जताते हुए कहा कि बिहार का खजाना खाली हो चुका है और केवल चुनावी लाभ के लिए बड़े पैमाने पर नकद वितरण किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है और राज्य में अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो गई है। उन्होंने कहा कि राजग सरकार ने राज्यहित की बजाय राजनीतिक लाभ को प्राथमिकता दी, जिससे बिहार की जनता, विशेषकर महिलाओं और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है।
चुनाव आयोग ने ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ अजय पाल शर्मा को बंगाल में दी बड़ी जिम्मेदारी
-मतदान से पहले टीएमसी उम्मीदवार को चेतावनी देते हुए दबंग आईपीएस का वीडियो वायरल
कोलकाता, 28 अप्रैल (वेब वार्ता)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण के मतदान से ठीक पहले चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश कैडर के चर्चित आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा को दक्षिण 24 परगना का नया पुलिस ऑब्जर्वर नियुक्त किया है। 29 अप्रैल को होने वाली 142 सीटों की वोटिंग से पहले कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आयोग ने 11 नए पर्यवेक्षकों की सूची जारी की है, जिसमें अजय पाल का नाम सबसे ऊपर है। नियुक्ति के तुरंत बाद ही उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया है, जिसमें वे फाल्टा इलाके से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवार जहांगीर खान को उनके घर जाकर सीधे लहजे में कानून का पालन करने और ‘सुधर जाने’ की चेतावनी देते नजर आ रहे हैं।
इस घटना के बाद बंगाल की राजनीति में उबाल आ गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस वीडियो को साझा करते हुए सख्त प्रशासन की सराहना की है, वहीं टीएमसी ने इसे चुनाव आयोग की साजिश करार दिया है। सत्ताधारी दल का आरोप है कि योगी आदित्यनाथ के ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ को केवल भय का माहौल पैदा करने के लिए ‘पैराशूट’ के जरिए उतारा गया है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए अजय पाल शर्मा को सत्ता पक्ष का एजेंट बताया है। हालांकि, चुनाव आयोग के सूत्रों का कहना है कि संवेदनशील इलाकों में निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए ऐसे सख्त अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य है।
2011 बैच के आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा की पहचान उत्तर प्रदेश में अपराधियों के मन में खौफ पैदा करने वाले एक ‘दबंग’ अफसर की रही है। वर्तमान में प्रयागराज में एडिशनल कमिश्नर के पद पर तैनात अजय पाल अपनी त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और साहसी एनकाउंटर्स के लिए जाने जाते हैं। विपक्षी दलों ने उनके अतीत के एनकाउंटर्स पर सवाल उठाते हुए उन्हें हटाने की मांग की है, लेकिन आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी उम्मीदवार द्वारा कानून तोड़ने पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी। जैसे-जैसे दूसरे चरण का मतदान करीब आ रहा है, अजय पाल शर्मा की हर गतिविधि पर राजनीतिक पंडितों और आम जनता की पैनी नजर बनी हुई है।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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