पश्चिम एशिया संकट गहराया तो मंदी की चपेट में आ सकती है दुनिया : गुटेरेस

न्यूयॉर्क, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया में गहराता संघर्ष अब केवल क्षेत्रीय संकट नहीं रह गया, बल्कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार और सामाजिक स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। श्री गुटेरेस ने संवाददाताओं से कहा कि हर गुजरते घंटे के साथ , विशेषकर होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन और व्यापार पर बढ़ते प्रतिबंधों के कारण स्थिति और अधिक खतरनाक होती जा रही है। यह संकट अब तीसरे महीने में प्रवेश कर चुका है और भले ही युद्धविराम नाजुक रूप में मौजूद हो, लेकिन इसके दुष्परिणाम तेजी से बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा, “पश्चिम एशिया संकट अपने तीसरे महीने में पहुंच चुका है। संघर्षविराम बेहद कमजोर है, लेकिन इसके परिणाम हर घंटे के साथ और अधिक गंभीर होते जा रहे हैं।” उन्होंने विशेष चिंता जताई कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे रणनीतिक समुद्री मार्ग में बाधाएं वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, व्यापारिक मार्गों और आर्थिक सुरक्षा को अस्थिर कर सकती हैं।
उन्होंने आगाह किया कि यदि यह व्यवधान वर्ष के अंत तक जारी रहता है, तो दुनिया एक बड़े आर्थिक संकट और संभावित वैश्विक मंदी की ओर बढ़ सकती है। उनका मानना है कि यदि यह संकट पूरे वर्ष बना रहता है, तो वैश्विक मंदी का भयावह परिदृश्य सामने आयेगा , जिसका असर लोगों की जिंदगी, अर्थव्यवस्था, राजनीतिक ढांचे और सामाजिक स्थिरता पर पड़ेगा।
संरा महासचिव ने कहा कि इस संकट के परिणाम रैखिक नहीं बल्कि “घातीय” हैं, यानी हालात धीरे-धीरे नहीं बल्कि अचानक और व्यापक रूप से बिगड़ सकते हैं। उन्होंने सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने और होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन अधिकारों को तुरंत बहाल करने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट कहा, “मेरा संदेश साफ है। सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 के अनुरूप नौवहन अधिकार और स्वतंत्रता तत्काल बहाल किए जाने चाहिए। सभी वाणिज्यिक जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित की जानी चाहिए।”
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने यह भी रेखांकित किया कि इस संघर्ष की कीमत पूरी मानवता चुका रही है, जबकि कुछ शक्तियां इससे लाभ कमा रही हैं। उन्होंने कहा, “हर युद्ध की तरह इस संघर्ष की कीमत भी पूरी दुनिया चुका रही है, भले ही कुछ लोग इससे भारी मुनाफा कमा रहे हों। इसका दर्द लंबे समय तक महसूस किया जाएगा।”
श्री गुटेरेस ने संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों का हवाला देते हुए बताया कि यदि संकट लंबा खिंचता है, तो लगभग 3.2 करोड़ लोग गरीबी में धकेले जा सकते हैं, जबकि उर्वरकों की कमी और कृषि उत्पादन में गिरावट के कारण 4.5 करोड़ अतिरिक्त लोग भुखमरी के खतरे का सामना कर सकते हैं। उन्होंने आशंका जताई कि विकास की वर्षों की उपलब्धियां रातोंरात खत्म हो सकती हैं।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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