बंगाल चुनाव नतीजों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा रुख: ममता बनर्जी को मिली नई याचिका दायर करने की अनुमति

नई दिल्ली,सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मतदाता सूची से हटाए गए नामों को लेकर अहम टिप्पणी की है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि यदि किसी निर्वाचन क्षेत्र में जीत का अंतर वहां से हटाए गए वोटों की संख्या से कम है, तो प्रभावित पक्ष इसके खिलाफ नई याचिका दायर कर सकता है। तृणमूल कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने दलील दी कि राज्य की 31 सीटों पर हार-जीत का फैसला बेहद कम अंतर से हुआ है, जबकि वहां बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए थे। उन्होंने उदाहरण दिया कि एक सीट पर उम्मीदवार मात्र 862 वोटों से हार गया, जबकि वहां 5,432 वोट हटाए गए थे।
चुनाव आयोग ने इन दलीलों का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि चुनाव परिणामों को चुनौती देने का एकमात्र कानूनी जरिया ‘चुनाव याचिका’ है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि मतदाता सूची में किए गए बदलावों (देलीशन) का चुनाव परिणामों पर गहरा असर पड़ा है, तो इस पर स्वतंत्र आवेदन के माध्यम से विचार किया जा सकता है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को सभी जरूरी विवरणों के साथ इंटरलोक्यूटरी एप्लीकेशन फाइल करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने अपीलीय न्यायाधिकरण में रिक्तियों और अपीलों के निपटारे में होने वाली देरी पर भी चिंता व्यक्त की है।
मामले की सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि हालिया चुनावों में भाजपा ने 207 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया है, जबकि टीएमसी 80 सीटों पर सिमट गई है। टीएमसी नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान हुई गड़बड़ियों ने नतीजों को प्रभावित किया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सही आवेदन मिलने पर वह मामले की गंभीरता से जांच करेगा। फिलहाल कोर्ट ने सुनवाई को स्थगित कर दिया है, लेकिन ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के पास अब कानूनी रूप से इन आंकड़ों को साबित करने का एक नया अवसर है।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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