मुख्यमंत्री फडणवीस की चेतावनी, कोई भी बैंक सिबिल स्कोर को लेकर किसान को कर्ज देने से मना नहीं करेगा

मुंबई, 23 मई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरूवार को राष्ट्रीयकृत बैंकों को कड़ी चेतावनी जारी करते हुए फसल ऋण के लिए सिबिल स्कोर की जांच करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया।
उन्होंने खरीफ फसल की तैयारियों को लेकर यहां आयोजित एक बैठक में कड़े शब्दों में घोषणा करते हुए कहा कि सभी बैंकों को अपने मुख्यालय से अपनी हर एक शाखा को एक आधिकारिक पत्र जारी करने का निर्देश दिया गया है जिसमें यह उल्लेख हो कि फसल ऋण के लिए सिबिल स्कोर पूरी तरह से अनावश्यक है। सिबिल को लेकर किसी भी शाखा को किसान का ऋण रोकने या मना करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
वह फसल संबंधी कर्ज के वितरण, कृषि ऋण माफी और आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों पर चर्चा करने के लिए यहां एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने बैठक के बाद कहा कि राज्य सरकार किसानों को अधिकतम कर्ज मुहैया कराने के लिए कड़े कदम उठा रही है, साथ ही वित्तीय संस्थानों को सिबिल स्कोर को लेकर किसानों को परेशान न करने के मानक निर्देश भी जारी कर रही है।
उन्होंने कृषि ऋण वितरण के संबंध में राष्ट्रीयकृत बैंकों के प्रदर्शन पर गहरा असंतोष व्यक्त किया। आंकड़ों से पता चलता है कि किसानों को वितरित कुल कृषि ऋण में जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की हिस्सेदारी 67 प्रतिशत है, जबकि बैंकों की हिस्सेदारी ऋणों में केवल 26 प्रतिशत है।
मुख्यमंत्री ने इस साल अल नीनो के प्रभाव की भी चर्चा की और बताया कि इस खरीफ सीजन को आ सकने वाले अल नीनो प्रभाव से एक गंभीर चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने इस वर्ष केवल 88 प्रतिशत वर्षा के दीर्घावधि औसत का अनुमान लगाया है। इसका प्रभाव विदर्भ, मराठवाड़ा और उत्तरी महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में तीव्रता से महसूस हो सकता है। मौसम विभाग का प्रारंभिक पूर्वानुमान महीने-दर-महीने (जून से सितंबर तक क्रमिक रूप से कम होने वाली) वर्षा में गिरावट की प्रवृत्ति की बात कहता है और यही नहीं बारिश के दिनों के बीच लंबा सूखा अंतराल भी रह सकता है।
इससे निपटने के लिए राज्य का ध्यान सूखे के दौर में सुरक्षात्मक सिंचाई को सक्षम करने के लिए वर्षा जल संचयन की ओर स्थानांतरित हो रहा है। प्रत्येक जिला प्रशासन और कृषि विश्वविद्यालय को स्थानीय आकस्मिक योजनाएं तैयार करने और कम पानी की स्थिति में फसलों के प्रबंधन के लिए किसानों को तैयार करने का आदेश दिया गया है।
बैठक में यह भी बताया गया कि किसानों से होने वाली धोखाधड़ी को खत्म करने और विशेषज्ञ ज्ञान को सीधे किसान समुदाय के हाथों में सौंपने के लिए सरकार ने चार डिजिटल प्लेटफॉर्म पेश किए हैं।
इन चार डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में सबसे पहले ‘साथी’ पोर्टल है, जो प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत प्रमाणित बीजों की बिक्री सुनिश्चित कर नकली बीजों के खतरे को रोकता है। दूसरा ‘महाविस्तार 2.0’ है, जो एक डिजिटल कृषि विशेषज्ञ के रूप में काम करता है जहां किसान स्थानीय भाषा में सवाल पूछकर त्वरित समाधान, हेल्पलाइन सहायता और अत्यधिक स्थानीय मौसम अलर्ट प्राप्त कर सकते हैं।
इसी में शामिल एक विशेष फीचर के जरिए किसान फसल की फोटो अपलोड कर संभावित कीट हमलों की भविष्यवाणी और उसके वास्तविक समय में उपाय जान सकते हैं। तीसरा ‘डीसीएस’ (डिजिटल क्रॉप सर्वे) सिस्टम है, जो केंद्र सरकार के सहयोग से किसानों को मोबाइल फोन के जरिए खुद फसल सर्वेक्षण प्रमाणित और अपलोड करने की सुविधा देता है, जिससे मैन्युअल सर्वेक्षण की गलतियां और फसल बीमा धोखाधड़ी पूरी तरह रुक जाती है। चौथा ‘सीबीडीसी’ मैकेनिज्म है, जिसके तहत सरकारी योजनाओं की वित्तीय सहायता सीधे किसान के डिजिटल वॉलेट में जाती है और बिचौलियों की गड़बड़ी को खत्म करते हुए यह राशि केवल खेती की आपूर्ति से जुड़े अधिकृत विक्रेताओं को ही ट्रांसफर की जा सकती है।
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