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मोहम्मद दीपक की आर्थिक स्थिति बिगड़ी, कहा- नौकरी की तलाश है उत्पीडन के चलते अपना शहर भी छोड़ना पड़ सकता है…

मोहम्मद दीपक की आर्थिक स्थिति बिगड़ी, कहा- नौकरी की तलाश है उत्पीडन के चलते अपना शहर भी छोड़ना पड़ सकता है…

देहरादून, उत्तराखंड के कोटद्वार में मोहम्मद दीपक नाम से सुर्खियों में आए जिम संचालक दीपक कुमार की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। उनका आरोप है कि भाजपा और बजरंग दल के दबाव व उत्पीड़न के कारण उन्हें अपना जिम बंद करना पड़ रहा है। लगातार घाटे और चार महीने का किराया न चुका पाने के कारण मकान मालिक ने उन्हें अल्टीमेटम दे दिया है। दीपक का कहना है कि अब वे जिम के उपकरण बेचकर शहर छोड़ देंगे और कहीं नौकरी की तलाश करेंगे।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ था जब 26 जनवरी को एक मुस्लिम दुकानदार के उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने के बाद दीपक कुमार देशभर में चर्चा में आ गए थे। कोटद्वार के पटेल मार्ग पर 70 वर्षीय वकील अहमद की बाबा नाम से कपड़ों की दुकान थी, जिसका नाम बदलने के लिए बजरंग दल के कार्यकर्ता दबाव बना रहे थे। उनका तर्क था कि कोटद्वार में सिर्फ एक ही बाबा हैं, जो कि प्रसिद्ध हनुमान मंदिर सिद्धबलि हैं। इस विवाद के बीच दीपक कुमार अकेले ही संगठन के कार्यकर्ताओं से भिड़ गए और जब उनसे उनकी पहचान पूछी गई तो उन्होंने खुद का नाम मोहम्मद दीपक बताते हुए कहा था कि वे न हिंदू हैं, न मुसलमान, बल्कि सबसे पहले एक इंसान हैं। इस घटना के बाद कई दिनों तक हाईवोल्टेज ड्रामा चला और पुलिस ने तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज की थीं।
42 वर्षीय दीपक कुमार का कोटद्वार में ‘हल्क’नाम से जिम है। उनका आरोप है कि विरोध प्रदर्शन के बाद से बजरंग दल के डर और राजनीतिक दबाव के कारण उनके जिम में लोगों का आना बेहद कम हो गया है। वर्तमान में जिम में केवल 60 से 65 सदस्य बचे हैं, जिससे 40 हजार रुपये मासिक किराया और संचालन का खर्च निकाल पाना नामुमकिन हो गया है। हालांकि, जिम के मकान मालिक रवि कुमार मनराल का कहना है कि उन्होंने परिसर खाली करने को नहीं कहा है, बल्कि सिर्फ किराये को लेकर स्थिति साफ करने के लिए कहा है। स्थानीय पुलिस के मुताबिक, उन्हें इस उत्पीड़न के संबंध में अब तक कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है। इससे पहले मार्च में दीपक कुमार ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कराने के लिए उत्तराखंड हाईकोर्ट का भी रुख किया था, लेकिन अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। साथ ही हाईकोर्ट की एकलपीठ ने उन्हें मामला विचाराधीन रहने तक सोशल मीडिया पर इस घटना से जुड़ी कोई भी पोस्ट न करने का सख्त निर्देश दिया था।

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