ईरान युद्ध में साथ न देने के लिए नाटो से निराश हूं: ट्रंप

अंकारा,। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि वह ईरान के खिलाफ चले युद्ध में संगठन की प्रतिक्रिया से बेहद निराश थे।
उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए तुर्की पहुंचे श्री ट्रंप ने यहां संवाददाताओं से कहा, “मैं नाटो से बेहद निराश था। हमें किसी मदद की ज़रूरत नहीं थी। एक तरह से मैं लोगों की परीक्षा ले रहा था। मैं देखना चाहता था कि वे हमारे साथ खड़े होंगे या नहीं, क्योंकि मैंने हमेशा कहा है कि हमने उनकी मदद की है लेकिन मुझे नहीं लगता कि वे जरूरत पड़ने पर हमारे साथ होंगे।”
ईरान के खिलाफ युद्ध 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले के साथ हुआ था। ईरान में कई जगह किये गये इन हवाई हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई, उनके कई परिजन, मिनाब में एक बालिका स्कूल की 160 छात्राएं तथा कई अन्य लोग मारे गये थे। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल तथा पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किये थे। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को भी सेना की मदद से बंद कर दिया था।
युद्ध में शामिल न होने के लिए नाटो सदस्यों की आलोचना कर चुके श्री ट्रंप कई बार संगठन को फटकार लगा चुके हैं। उन्होंने नाटो देशों पर अमेरिका पर जरूरत से ज्यादा निर्भर रहने का आरोप भी लगाया है। कई नाटो सदस्यों ने ईरान के ख़िलाफ़ अभियान के लिए अपनी ज़मीन, हवाई क्षेत्र या सैन्य सुविधाओं का इस्तेमाल करने की अमेरिकी अनुमति को साफ़ तौर पर ठुकरा दिया था, जबकि अन्य देशों ने इस अभियान से पूरी तरह दूरी बना ली थी। उनका तर्क था कि यह युद्ध नाटो गठबंधन के दायरे से बाहर जाकर अमेरिका और इज़रायल ने शुरू किया था।
ब्रिटेन ने खाड़ी में ब्रिटिश हितों एवं सहयोगियों की सुरक्षा के लिए सीमित रक्षात्मक मकसद से अपनी कुछ सैन्य सुविधाओं का इस्तेमाल करने की इजाज़त देकर अमेरिका को सीमित समर्थन दिया, हालांकि उसने भी आक्रामक अभियानों में हिस्सा लेने से खुद को दूर रखा था।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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