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हिंद महासागर में आईओडी के प्रभाव से कम होगा अल-नीनो का असर, मॉनसून के पूर्वानुमान में तकनीकी सुधार से मिलेगी बड़ी राहत

हिंद महासागर में आईओडी के प्रभाव से कम होगा अल-नीनो का असर, मॉनसून के पूर्वानुमान में तकनीकी सुधार से मिलेगी बड़ी राहत

अमरावती, 09 जुलाई । भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम), पुणे के निदेशक डॉ. अंगुलुरी सूर्यचंद्र राव ने बताया कि हिंद महासागर में विकसित हो रहा ‘इंडियन ओशन डिपोल’ (आईओडी) अल-नीनो के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने में सहायक होगा। डॉ. राव के अनुसार, 1997 की अल-नीनो घटना के दौरान भी इसी तरह के डाइपोल ने मानसून पर पड़ने वाले नकारात्मक असर को नियंत्रित किया था। वर्तमान में प्रशांत महासागर में शुरू हुए ‘सुपर अल-नीनो’ के कारण मानसून की रफ्तार धीमी हुई है, लेकिन IOD की अनुकूल स्थिति के कारण अच्छी बारिश की उम्मीद बनी हुई है।
तकनीकी सुधार और सटीक पूर्वानुमान

मौसम पूर्वानुमान की सटीकता को लेकर डॉ. राव ने बताया कि ‘मानसून मिशन’ के तहत अब पूर्वानुमान सटीकता का स्तर 0.2-0.4 से बढ़कर 0.75-0.8 के बीच पहुंच गया है। रिज़ॉल्यूशन को भी 38 किलोमीटर से बेहतर कर 6 किलोमीटर के ग्रिड पर लाया गया है। इसके अलावा, किसानों और आम जनता के लिए ‘मौसम वाणी’ ऐप लॉन्च किया जा रहा है जो चैटजीपीटी आधारित होगा और बिना स्मार्टफोन के भी काम करेगा। ‘दामिनी’ और ‘मेघदूत’ जैसे एप्स पहले से ही बिजली गिरने और खेती संबंधी सटीक सलाह देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
सुपरकंप्यूटिंग और एआई का प्रभावी उपयोग

आईआईटीएम अब 12 पेटाफ्लॉप्स क्षमता वाले सुपरकंप्यूटर्स और एआई-मशीन लर्निंग के वर्चुअल सेंटर का उपयोग कर रहा है। इससे अचानक आने वाली बाढ़, जंगल की आग और जलाशय प्रबंधन जैसी आपदाओं का किलोमीटर-लेवल पर सटीक अनुमान लगाया जा सकेगा। ग्लोबल वार्मिंग के कारण बदलती मौसमी परिस्थितियों और बादलों के फटने जैसी घटनाओं को देखते हुए, संस्थान ‘मिशन मौसम’ के तहत अपने मॉडल्स को निरंतर बेहतर बना रहा है ताकि जनता को समय रहते भारी बारिश और आंधी-तूफान की चेतावनी दी जा सके।

सियासी मियार की रीपोर्ट