भारत में पुरानी कारों का बाजार हुआ डिजिटल : रिपोर्ट
नई दिल्ली, । भारत में पुरानी कारों को खरीदने और बेचने का तरीका तेजी से बदल रहा है, जिसमें डिजिटल प्लेटफॉर्म महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यूबीएस की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक ग्राहक अब स्थानीय डीलरों या जान-पहचान के बजाय ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कारों की जानकारी और तुलना करके खरीदारी का फैसला ले रहे हैं। अनुमान है कि यह बदलाव आने वाले सालों में और तेज होगा, जिससे भारत का पुरानी कारों का बाजार 2031 तक बढ़कर 90 लाख से 1 करोड़ वाहनों तक पहुंच सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2026 में करीब 60 लाख पुरानी कारों की खरीद-बिक्री होने का अनुमान है। इसके साथ ही, बेहतर क्वालिटी और अपेक्षाकृत नए मॉडलों की बढ़ती मांग के कारण पुरानी कारों की औसत कीमत भी 5 लाख रुपये से बढ़कर 6.5 से 6.9 लाख रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। ग्राहक अब औसतन 5.5 साल के बजाय करीब 4.5 साल में अपनी कार बदल रहे हैं, जिससे बाजार में पुरानी कारों की उपलब्धता बढ़ेगी और खरीद-बिक्री में तेजी आएगी। फिलहाल, भारत में पुरानी कारों की लगभग 80 फीसदी खरीद-बिक्री अभी भी असंगठित तरीके से स्थानीय डीलरों या सीधे खरीदार-विक्रेता के बीच होती है। यह स्थिति ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के लिए एक बड़ा अवसर प्रदान करती है, क्योंकि अमेरिका, ब्रिटेन और जापान जैसे देशों की तुलना में भारत में संगठित और डिजिटल बाजार की हिस्सेदारी अभी काफी कम है।
अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म सिर्फ कार की तस्वीरें और कीमत ही नहीं दिखा रहे, बल्कि वाहन की जांच, सही कीमत का आकलन, फाइनेंस, बीमा और दस्तावेजों से जुड़ी सुविधाएं भी प्रदान कर रहे हैं। भविष्य में डिजिटल पेमेंट, एस्क्रो अकाउंट और होम डिलीवरी जैसी एंड-टू-एंड सेवाएं भी तेजी से जुड़ेंगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी इस बाजार को बदल रहा है, जो ग्राहकों की जरूरत के हिसाब से कार सुझाने, सही खरीदार-विक्रेता का मिलान करने और कीमत तय करने में मदद करेगा, जिससे सौदे जल्दी पूरे होंगे। केवल आम ग्राहक ही नहीं, बल्कि बैंक, एनबीएफसी और बीमा कंपनियां भी अब अपनी पुरानी या जब्त की गई गाड़ियों की बिक्री के लिए ऑनलाइन नीलामी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रही हैं।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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