ईरान ने कुवैत के वाटर प्लांट्स पर किया बड़ा हमला, 90% आबादी के सामने जल संकट

तेहरान, । मिडिल-ईस्ट में इस समय हालात काफी ज्यादा खराब और तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे भयंकर युद्ध का असर अब खाड़ी क्षेत्र पर पड़ रहा है। अमेरिकी हमले के जवाब में अब ईरान लगातार अमेरिका के सहयोगी देशों को अपना निशाना बना रहा है। मंगलवार को कुवैत ने आरोप लगाया कि ईरान ने उसके पॉवर प्लांट पर बहुत बड़ा हमला किया है।
कुवैत के बिजली और जल मंत्रालय ने बताया कि ईरान ने लगातार चौथे दिन उनके प्लांट पर यह हमला किया है। इन हमलों के कारण वहां कई जगह भयंकर आग लग गई है और प्लांट्स को भारी नुकसान पहुंचा है। कुवैत का कहना है कि समुद्री पानी को पीने योग्य बनाने वाले ये डिसेलिनेशन प्लांट बहुत अहम हैं। मंत्रालय ने कहा कि प्रभावित संयंत्रों की मरम्मत का काम तेजी से शुरू कर दिया गया है।
90 प्रतिशत आबादी पर जल संकट
कुवैत में पीने के पानी की आपूर्ति का एक बहुत बड़ा हिस्सा समुद्री पानी को साफ करके ही पूरी तरह तैयार किया जाता है। देश की करीब 90 प्रतिशत आबादी की पेयजल की मुख्य जरूरत इन्हीं बड़े डिसैलिनेशन प्लांट्स से ही पूरी होती है। इसलिए ईरान द्वारा इन अहम प्लांट पर हुए मिसाइल हमलों को कुवैत सरकार द्वारा बेहद ही गंभीर माना जा रहा है।
खाड़ी देशों पर ईरान का कहर
अमेरिका लगातार ईरान पर बड़े हमले करके उसकी सैन्य क्षमता को कमजोर करने और भारी नुकसान पहुंचाने की पूरी कोशिश कर रहा है। यू.एस. सेंट्रल कमांड की तरफ से ईरान पर किए गए नए सैन्य हमले की भी पूरी विस्तृत जानकारी दी गई है। इसके बाद से ही दोनों देशों के बीच टकराव बहुत ज्यादा बढ़ गया है और युद्ध की स्थिति गंभीर हो गई है।
वॉल स्ट्रीट जर्नल की चेतावनी
अमेरिकी हमलों से पूरी तरह बौखलाया ईरान अब अमेरिका के करीबी माने जाने वाले सभी खाड़ी देशों को निशाना बना रहा है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक पुरानी विस्तृत रिपोर्ट में भी यह बहुत बड़ा दावा किया गया था कि ईरान ऐसा कर सकता है। इस अहम रिपोर्ट के सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में एक बड़ा हाई अलर्ट बहुत पहले ही जारी कर दिया गया था। कुवैत ने अब अपने सभी महत्वपूर्ण ठिकानों की सुरक्षा को बहुत ही ज्यादा कड़ा कर दिया है।
मिडिल-ईस्ट में युद्ध का खतरा
कुवैत की महत्वपूर्ण सुविधाओं पर ईरान का यह सीधा हमला पूरे मिडिल-ईस्ट की सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है। इन हमलों से न केवल कुवैत की बुनियादी ढांचागत सुविधाएं चरमरा गई हैं, बल्कि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर भी बहुत बुरा असर पड़ेगा। इस भारी तनाव के कारण खाड़ी देशों में आगे चलकर बहुत बड़ा ऊर्जा और जल संकट पैदा होने की पूरी आशंका उत्पन्न हो गई है। वैश्विक समुदाय इस युद्ध को रोकने की कोशिश कर रहा है।
अमेरिका और ईरान का टकराव
अमेरिका और ईरान के बीच यह भारी सैन्य टकराव अब एक बहुत ही भयानक और खतरनाक मोड़ पर पूरी तरह से पहुंच गया है। कुवैत जैसे छोटे और शांतिप्रिय देशों को इस अंतरराष्ट्रीय युद्ध का भारी और अनावश्यक खामियाजा अब जबरदस्ती भुगतना पड़ रहा है। पानी जैसे अहम संसाधनों पर ऐसे मिसाइल हमले अंतरराष्ट्रीय नियमों का एक बहुत ही गंभीर और स्पष्ट उल्लंघन माने जाते हैं।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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