केरल के मंत्री सी पी जॉन ने महिलाओं के परिवहन को लेकर की टिप्पणी पर खेद जताया
तिरुवनंतपुरम, केरल के परिवहन मंत्री सी. पी. जॉन ने बुधवार को कहा कि प्रियदर्शिनी योजना के संबंध में उनकी किसी भी टिप्पणी का उद्देश्य महिलाओं का अपमान करना नहीं था और यदि उनके बयान से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो उन्हें इसका खेद है।
मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि उन्हें अपने शब्दों के चयन में अधिक सावधानी बरतनी चाहिए थी और उन्हें विवादित टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी।
जॉन ने निजी बस मालिकों के एक कार्यक्रम में कहा था कि राज्य की मुफ्त ‘प्रियदर्शिनी’ बस यात्रा योजना और सरकारी अस्पतालों का लाभ लेने वाली महिलाएं अपने बच्चों को निजी विद्यालयों में पढ़ाना पसंद करती हैं। उनके इस बयान के बाद राज्य में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।
जॉन ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैं एक छोटे-से कार्यक्रम में बोल रहा था और अनौपचारिक ढंग से कुछ शब्दों का इस्तेमाल कर बैठा। मुझे अपने शब्दों के चयन में सावधानी बरतनी चाहिए थी। मुझे ऐसा नहीं कहना चाहिए था। मेरे अंदर कोई झूठा अहंकार नहीं है और मैंने जो कहा, उस पर खेद व्यक्त करने में मुझे कोई परेशानी नहीं है। यदि मेरी टिप्पणी से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो मैं उसके लिए खेद व्यक्त करता हूं। मेरा किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने या किसी का अपमान करने का कोई इरादा नहीं था। हम ‘प्रियदर्शिनी’ योजना को जारी रखेंगे, क्योंकि यह यूडीएफ सरकार की प्रतिष्ठित प्रमुख योजनाओं में से एक है।’’
प्रियदर्शिनी योजना के तहत राज्य परिवहन निगम की साधारण बस सेवाओं में महिलाओं को मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जाती है। यह विधानसभा चुनाव के दौरान संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) द्वारा घोषित ‘इंदिरा गारंटी’ योजनाओं में से एक है।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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