भगवान मुझे…

-आलोक कुमार-
एक स्वप्न पूर्ण हो ले,
उन्मुक्त विचरने को,
भगवान मुझे,
एक गगन भेंट कर दो।
एक अन्त निकट हो ले,
क्षितिज पकड़ने को,
भगवान मुझे,
एक पवन भेंट कर दो।
एक हृदय मुग्ध हो ले,
सौन्दर्य समझने को,
भगवान मुझे,
एक सुमन भेंट कर दो।
एक प्रासाद रिक्त हो ले,
तत्काल ठहरने को,
भगवान मुझे,
एक सदन भेंट कर दो।।
(रचनाकार डाॅट काॅम से साभार)
सियासी मियार की रीपोर्ट
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