“ताऊओं का दुलार”
-डॉ. प्रियंका सौरभ-
ताऊँओं की छाँव में,
खिलता नन्हा फूल।
हँसी-खुशी से सीखता,
जीवन के उसूल॥
नन्हे हाथों में सजा,
सपनों का संसार।
ताऊँ देते हर घड़ी,
ममता भरा दुलार॥
खिलौनों संग खेलते,
हँसी करे कलरव।
घर-आँगन में गूँजता,
बचपन का उत्सव॥
ताऊँ कहते प्रेम से,
सच्चाई की राह।
मेहनत से मिलता सदा,
जीवन में निर्वाह॥
रिश्तों की यह गर्मियाँ,
अनमोल उपहार।
ताऊँओं के स्नेह से,
महके घर-द्वार॥
सियासी मियार की रीपोर्ट
Siyasi Miyar | News & information Portal Latest News & Information Portal