Saturday , October 3 2026

आस्तीनों में ही सांप पले है

आस्तीनों में ही सांप पले है

-अमित भटोरे-

आस्तीनों में ही सांप पले है
हाथी पोरस के साथ चले है,
रातों में भी नींद कहां अब
दिनभर चलकर पैर जले है,
हम ही कमतर क्यों लगते
सब कहते वो लोग भले है,
जग को करते फिरते रोशन
दीपक जलकर हाथ मले है,
अमित सब इतने क्यों डरते है
चंदन पर भी सर्प पले है।।

(रचनाकार डॉट कॉम से साभार प्रकाशित)

सियासी मियार की रीपोर्ट