वैलेन्टाइन डे (14 फरवरी) पर विशेष: प्रेम के दोहे
-प्रो.शरद नारायण खरे-

मुलाकात तुझसे हुई, है मुझको दिन याद।
तेरे मिलने ने किया, मुझे सदा आबाद। ।
करो इरादा प्रेम का, तो मिलता है मीत।
जिससे अधरों पर सजे, खुशहाली का गीत। ।
वादा करना सोचकर, फिर मत देना तोड़।
जिसको अपनाना उसे, देना कभी न छोड़। ।
करो अगर इकरार तुम, फिर मत कर इनकार।
यही प्रेम की चेतना, यही प्रेम-आधार। ।
सोच-समझ ही दो सदा, दिल का तो प्रस्ताव।
बात तभी जब अंत तक, रहे प्रेम का ताव। ।
बंधन हो मजबूत जब, तभी बढ़ेगी शान।
करना नित ही प्रेम का, दिल से सब सम्मान। ।
आया है देखो शरद, निकट आज मधुमास।
हर दिल में तो पर रहा आज प्रखर विश्वास। ।
अंधकार को मारकर, देता जो उजियार।
कहता है सारा जगत, उसको ही तो प्यार। ।
प्रेम ईश का रूप है, लगता है दिनमान।
जो भावों की श्रेष्ठता, शुभ-मंगल का गान। ।
रखो हृदय को निष्कलुष, करो सदा निर्वाह।
तभी प्रेम की चेतना, पाती चोखी राह। ।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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