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गुजरात विधानसभा ने अवैध संपत्ति हस्तांतरण पर अंकुश लगाने संबंधी विधेयक को मंजूरी दी

गुजरात विधानसभा ने अवैध संपत्ति हस्तांतरण पर अंकुश लगाने संबंधी विधेयक को मंजूरी दी

गांधीनगर, 27 मार्च । जनसांख्यिकीय बदलाव और एक विशेष समुदाय के लिए सुरक्षा उपायों पर तीखी बहस के बाद, गुजरात विधानसभा ने बुधवार को 1991 के एक अधिनियम में संशोधन के लिए एक विधेयक को मंजूरी दे दी।

इस संशोधन का उद्देश्य अवैध संपत्ति हस्तांतरण पर अंकुश लगाना और वैध मालिकों के लिए सुरक्षा उपायों को मजबूत करना है।

गुजरात के अशांत क्षेत्रों में अचल संपत्ति के हस्तांतरण पर रोक और किरायेदारों को परिसर से बेदखली से सुरक्षा प्रदान करने संबंधी अधिनियम, 1991 में संशोधन करने वाला यह विधेयक बजट सत्र के अंतिम दिन ध्वनि मत से पारित किया गया।

राजस्व राज्य मंत्री संजयसिंह महिदा ने इस विधेयक को एक विशेष समुदाय के लिए आवश्यक सुरक्षा उपाय के रूप में प्रस्तुत करते हुए सनातन धर्म पर हुए ऐतिहासिक हमलों का हवाला दिया और ‘लैंड जिहाद’ और ‘लव जिहाद’ से प्रेरित जबरन पलायन के खिलाफ चेतावनी दी।

उन्होंने सदन में विधेयक पेश करते हुए कहा, ‘‘हजारों वर्षों से, उत्पीड़कों के अत्याचारों से बचने के लिए, खुद को ‘लैंड जिहाद’ और ‘लव जिहाद’ से बचाने के लिए, और अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए अपनी गौरवशाली सनातन धर्म विरासत को बरकरार रखने के लिए, बहुसंख्यक समाज पलायन करता रहा है।’’

विपक्षी कांग्रेस ने विधेयक को समर्थन देने से इनकार कर दिया, जिससे सदन में सांप्रदायिक सद्भाव और जनसांख्यिकीय बदलावों को लेकर तीखी बहस हुई।

महिदा ने अहमदाबाद में जनसांख्यिकीय बदलावों को रेखांकित करते हुए दानिलिम्दा जैसे क्षेत्रों का उदाहरण दिया, जहां कई हिंदू-बहुसंख्यक समुदायों की आबादी में कमी आई है।

महिदा ने कहा कि ‘निर्दिष्ट क्षेत्र’ का टैग यह सुनिश्चित करता है कि व्यक्तियों को अनैच्छिक पलायन के लिए मजबूर न किया जाए।

कांग्रेस ने सरकार के इस बयान का कड़ा विरोध किया और 1986 में एक अस्थाई उपाय के रूप में बनाए गए कानून को जारी रखने पर सवाल उठाया।

कांग्रेस विधायक इमरान खेड़ावाला ने सत्ताधारी पार्टी के दंगा-मुक्त राज्य के दावों में मौजूद घोर विरोधाभास की ओर इशारा किया।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर वाकई पूरी तरह से शांति है, तो अशांत क्षेत्र अधिनियम का विस्तार क्यों किया जा रहा है और इसे नए क्षेत्रों पर क्यों लागू किया जा रहा है?’’

कांग्रेस विधायक ने इंगित किया कि कानून का दायरा अहमदाबाद से बढ़कर गुजरात के 744 क्षेत्रों तक फैल गया है, जिनमें छोटे गांव भी शामिल हैं।

सियासी मियार की रीपोर्ट