जम्मू-कश्मीर विधानसभा अध्यक्ष ने विधायकों की सुरक्षा पर व्यक्त की चिंता

जम्मू, 02 अप्रैल। जम्मू-कश्मीर विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने मंगलवार को कहा कि विधायकों और पार्टी कार्यालयों से सुरक्षा हटाने का मामला चिंता का विषय है और इस पर गंभीर सावधानी बरतने की जरूरत है तथा इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला पर हुए जानलेवा हमले के बाद सुरक्षा हटाना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा पिछले कुछ दिनों से चर्चा में है और संबंधित अधिकारियों को इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
विधानसभा अध्यक्ष ने इस बात पर बल दिया कि सुरक्षा व्यवस्था स्थापित मानदंडों एवं विनियमों के अनुसार ही सख्ती से करनी चाहिए और यह भी कहा कि इस प्रकार की व्यवस्थाओं के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक वर्गीकरण प्रणाली मौजूद है।
उन्होंने कहा कि इस सदन का संदेश स्पष्ट है और संबंधित अधिकारियों को ऐसे निर्णयों की समीक्षा करनी चाहिए और उन स्थितियों का आकलन करना चाहिए जहां सुरक्षा को लेकर वास्तविक आशंका और आवश्यकता हो।
श्री राथर ने कहा, “मौजूदा हालात को देखते हुए हमें सतर्क रहना होगा और ऐसे मामलों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। हमें यह समझना होगा कि अतीत की घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और उनसे वर्तमान फैसलों को दिशा मिलनी चाहिए। हमें अतीत में झेली गई पीड़ाओं को ध्यान में रखना होगा।”
उन्होंने आगे कहा कि सुरक्षा प्रदान करने या वापस लेने के संबंध में मनमाना फैसला करने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि यह सर्वोच्च सदन है और यहां उठाए गए मुद्दों को अत्यंत गंभीरता से लेना चाहिए।
इससे पहले विधायकों ने सुरक्षा मुद्दे पर चर्चा की और संबंधित अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। इस मुद्दे पर बोलने वाले विधायकों में न्यायमूर्ति हसनैन मसूदी, नज़ीर खान गुरेजी, निज़ामुद्दीन भट, सुरजीत सिंह सलाथिया, सलमान सागर, सज्जाद गनी लोन, जावेद हसन बेग और रफीक नायक शामिल थे।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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