नेपाल सरकार के ट्रेड यूनियन खत्म करने के फैसले के खिलाफ कर्मचारी संगठन अदालत जाने की तैयारी में

काठमांडू, 06 मई । नेपाल सरकार द्वारा सिविल सेवा कर्मचारी ट्रेड यूनियन को समाप्त करने के निर्णय पर छह कर्मचारी संगठनों ने कड़ा एतराज जताते हुए इसे अस्वीकार करने की घोषणा की है। उन्होंने इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने की चेतावनी दी है।
मंगलवार को जारी प्रेस बयान में नेपाल निजामति कर्मचारी संगठन, नेपाल निजामति कर्मचारी यूनियन, नेपाल राष्ट्रीय निजामति कर्मचारी संगठन, एकीकृत सरकारी कर्मचारी संगठन, नेपाल मधेसी निजामति कर्मचारी मंच और स्वतन्त्र राष्ट्र सेवक कर्मचारी संगठन के केंद्रीय अध्यक्षों ने सरकार के इस कदम को मनमाना बताते हुए खेद व्यक्त किया है।
उन्होंने कहा कि नेपाल के संविधान की धारा 17 और धारा 34, प्रचलित ट्रेड यूनियन तथा श्रम कानून, 1948 की मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा की धारा 20, तथा श्रम संबंधी अंतर्राष्ट्रीय महासंधि संख्या 7, 9, 144, 151 और 154 के अनुसार श्रमिकों और राष्ट्र सेवकों को संगठित होने का अधिकार प्राप्त है। इन अधिकारों की रक्षा करते हुए सभी कर्मचारियों के पेशागत विकास को सुनिश्चित करने के लिए संघीय सिविल सेवा कानून को तुरंत लागू करने की भी उन्होंने मांग की है।
वर्तमान सरकार द्वारा छीने गए ट्रेड यूनियन अधिकारों की पुनर्स्थापना की मांग करते हुए कर्मचारी संगठनों ने आवश्यक होने पर कानूनी लड़ाई लड़ने की चेतावनी दी है।
प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह की सरकार द्वारा हाल ही में कानूनों में संशोधन करने के लिए एक अध्यादेश जारी किया था, जिसे राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल ने अनुमोदित किया। इस अध्यादेश के लागू होने के बाद दशकों से चला आ रहा कर्मचारी ट्रेड यूनियन समाप्त हो गया।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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