शुभेंदु ने सड़कों के नाम की समीक्षा के लिए पैनल का किया एलान, कहा- ‘नहीं रहेंगे मुगल, पठान नाम’

कोलकाता, 25 जून । पश्चिम बंगाल सरकार ने मंगलवार को राज्य भर में सड़कों और सार्वजनिक स्थानों का नाम बदलने की सिफारिश करने के लिए एक समिति के गठन का एलान किया। इसके साथ ही सरकार ने स्पष्ट किया कि “मुगल और पठान शासन” से जुड़े नामों को कोलकाता के परिदृश्य से धीरे-धीरे हटाया जायेगा।
विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने यह घोषणा की और बताया कि इस पैनल की अध्यक्षता स्वामी प्रदीप्तानंद उर्फ कार्तिक महाराज करेंगे।
मुख्यमंत्री ने दक्षिण कोलकाता के पार्क सर्कस इलाके में सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी रोड करने के हालिया फैसले का बचाव किया और संकेत दिया कि आने वाले महीनों में ऐसे और भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
श्री अधिकारी ने सदन में कहा, “सुहरावर्दी के नाम के लिए कोई जगह नहीं होगी। कोलकाता की किसी भी सड़क पर मुगल या पठान शासकों के नाम नहीं रहने चाहिये।”
यह टिप्पणी तब आई, जब विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने नाम बदलने की इस कवायद पर सवाल उठाये और ऐतिहासिक नामों को बदलने के लिए अपनाये जा रहे मानदंडों को लेकर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा।
श्री अधिकारी ने घोषणा की कि कार्तिक महाराज के नेतृत्व वाली समिति को सड़कों, संस्थानों और अन्य सार्वजनिक स्थलों के नामों का मूल्यांकन करने तथा उनके लिए उपयुक्त वैकल्पिक नाम सुझाने का काम सौंपा जायेगा। मुख्यमंत्री के अनुसार, इसका उद्देश्य उन विभूतियों को सम्मानित करना है, जिन्होंने बंगाल की सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी परंपराओं में अपना योगदान दिया।
श्री अधिकारी ने अपने भाषण का इस्तेमाल लोकतांत्रिक अधिकारों और राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों के मुद्दे पर अपने प्रशासन और पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के बीच अंतर दिखाने के लिए भी किया।
उन्होंने विधानसभा को आश्वासन दिया कि मौजूदा व्यवस्था में विपक्षी दलों को प्रदर्शन, रैलियां या धरना आयोजित करने से नहीं रोका जायेगा। उन्होंने कहा, “विपक्ष के कार्यक्रमों में कोई बाधा नहीं डाली जायेगी। वे चाहें तो हर रोज रैलियां कर सकते हैं।”
मुख्यमंत्री ने उस समय को याद किया जब वे विपक्ष के नेता के रूप में काम करते थे और आरोप लगाया कि तत्कालीन तृणमूल सरकार ने अक्सर उनकी राजनीतिक गतिविधियों पर रोक लगाई थी।
श्री अधिकारी के अनुसार, उन्हें बैठकों, रैलियों और राज्य के विभिन्न हिस्सों के दौरों की अनुमति लेने के लिए बार-बार अदालतों का रुख करना पड़ा था। उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ कई मामले दर्ज किये गये थे और उन्हें कई मौकों पर विधानसभा से निलंबित भी किया गया था।
पिछली सरकार पर सीधा तंज कसते हुए उन्होंने कहा, “मुझे पांच बार सदन से निलंबित किया गया और करीब साढ़े ग्यारह महीने तक बाहर रखा गया। मेरे खिलाफ 100 से ज्यादा मामले दर्ज किये गये। फिर भी हमने किसी से अपने मुंह पर प्लास्टर लगाने को नहीं कहा है।”
मुख्यमंत्री ने कोलकाता के वाई-चैनल पर हाल ही में हुए अपनी पूर्ववर्ती सुश्री ममता बनर्जी के विरोध कार्यक्रम का भी जिक्र किया। इस प्रदर्शन की अनुमति देने के प्रशासनिक फैसले को याद करते हुए श्री अधिकारी ने कहा कि पुलिस ने आयोजन स्थल को लेकर निर्देश मांगे थे और सरकार ने धरने की इजाजत दे दी थी।
श्री अधिकारी ने कहा कि सरकार राज्य के पुनर्निर्माण पर ध्यान केंद्रित कर रही है और उन्होंने विपक्ष से विकास और शासन से जुड़े मुद्दों पर सहयोग करने का आग्रह किया।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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