राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2026: पीएम मोदी की अपील, हैंडलूम खरीदें और भारतीय बुनकरों का बढ़ाएं सम्मान

नई दिल्ली, 07 अगस्त आज 7 अगस्त का दिन भारत के इतिहास में बेहद खास माना जाता है। इसी दिन वर्ष 1905 में स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत हुई थी। यह आंदोलन केवल विदेशी सामान के बहिष्कार तक सीमित नहीं था। इसने देश में आत्मनिर्भरता और स्वदेशी सोच को नई पहचान दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने वीडियो संदेश में इसी ऐतिहासिक दिन को याद करते हुए देशवासियों से राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पूरे उत्साह के साथ मनाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि स्वदेशी आंदोलन ने देश को आत्मनिर्भर बनने की नई दिशा दिखाई। उस समय लाखों भारतीयों ने विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया। लोगों ने अपने देश में बने सामान को अपनाकर आजादी की लड़ाई को मजबूत बनाया। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भी उसी भावना को आगे बढ़ाने की जरूरत है।
स्वदेशी आंदोलन से आत्मनिर्भर भारत तक का सफर
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि 7 अगस्त 1905 केवल एक तारीख नहीं है। यह भारत के आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का प्रतीक भी है। स्वदेशी आंदोलन ने भारतीय कारीगरों और बुनकरों को नई पहचान दी। आज आत्मनिर्भर भारत अभियान भी उसी सोच को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि जब हम देश में बने उत्पाद खरीदते हैं, तब हम केवल सामान नहीं खरीदते। हम लाखों परिवारों के सपनों और मेहनत का सम्मान भी करते हैं। यही सोच भारत की आर्थिक मजबूती को नई दिशा देती है। फ्रेंडशिप डे जैसी खुशी से मनाएं राष्ट्रीय हथकरघा दिवस प्रधानमंत्री ने युवाओं से खास अपील करते हुए कहा कि जैसे सभी लोग फ्रेंडशिप डे उत्साह से मनाते हैं, वैसे ही राष्ट्रीय हथकरघा दिवस भी पूरे जोश के साथ मनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह दिन केवल एक कार्यक्रम नहीं है। यह भारतीय संस्कृति, परंपरा और मेहनतकश बुनकरों के सम्मान का अवसर है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के अलग-अलग राज्यों में रहने वाले बुनकर अपनी कला से सुंदर कपड़े तैयार करते हैं। उनके हाथों का हुनर भारत की सांस्कृतिक पहचान को दुनिया तक पहुंचाता है।
हैंडलूम खरीदना क्यों है जरूरी
प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से आग्रह किया कि हर व्यक्ति कम से कम एक हैंडलूम उत्पाद जरूर खरीदे। इससे सीधे तौर पर बुनकर परिवारों की आय बढ़ेगी। छोटे कारीगरों को रोजगार मिलेगा और स्थानीय उद्योग मजबूत होंगे।
उन्होंने कहा कि जब लोग भारतीय हथकरघा उत्पाद खरीदेंगे, तब गांवों की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। इससे आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई गति मिलेगी। देश के लाखों बुनकर परिवार आर्थिक रूप से सशक्त बन सकेंगे।
सोशल मीडिया पर रील साझा करने की भी अपील
प्रधानमंत्री ने लोगों से एक नई पहल में जुड़ने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि हैंडलूम उत्पाद खरीदने के बाद उसके साथ एक छोटा वीडियो या रील बनाकर सोशल मीडिया पर साझा करें।
उन्होंने कहा कि इससे दुनिया भारतीय बुनकरों की कला, मेहनत और रचनात्मकता को करीब से देख सकेगी। सोशल मीडिया के माध्यम से भारतीय हथकरघा उद्योग को वैश्विक पहचान भी मिलेगी। भारतीय बुनकरों की मेहनत को मिले सम्मान भारत का हथकरघा उद्योग हजारों वर्षों पुरानी परंपरा का हिस्सा है। वाराणसी, चंदेरी, महेश्वरी, कांजीवरम, पोचमपल्ली और भागलपुरी जैसे कई प्रसिद्ध वस्त्र पूरी दुनिया में पसंद किए जाते हैं। इन उत्पादों के पीछे लाखों बुनकर परिवारों की मेहनत और कौशल छिपा होता है।
- राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 7 अगस्त को ही क्यों मनाया जाता है?
7 अगस्त 1905 को स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत हुई थी। इसी ऐतिहासिक महत्व को याद करते हुए हर वर्ष 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया जाता है।
- PM मोदी ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर क्या अपील की?
प्रधानमंत्री ने देशवासियों से हैंडलूम उत्पाद खरीदने, भारतीय बुनकरों का समर्थन करने और हैंडलूम उत्पाद के साथ रील या वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने की अपील की।
- हैंडलूम उत्पाद खरीदने से क्या लाभ होता है?
हैंडलूम उत्पाद खरीदने से बुनकर परिवारों की आय बढ़ती है, स्थानीय उद्योग मजबूत होता है, रोजगार के अवसर बढ़ते हैं और आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती मिलती है।
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