यौन अपराधों के मामले में सजा पाए भारतीय मूल के सर्जन को ब्रिटेन में चिकित्सकीय कार्य से रोका गया

लंदन, । उत्तरी ब्रिटेन के एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) अस्पताल में महिला कर्मचारियों का यौन शोषण करने के लिए अपने पद का दुरुपयोग करने पर जेल की सजा पाए भारतीय मूल के एक वरिष्ठ हृदय सर्जन को ब्रिटेन में चिकित्सकीय कार्य करने से रोक दिया गया है।
डॉ. अमल कृष्ण बोस (55) को पिछले साल सितंबर में छह साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। उन्हें 2017 और 2022 के बीच लंकाशायर के ‘ब्लैकपूल विक्टोरिया’ अस्पताल में महिला स्टाफ की पांच सदस्यों को गलत तरीके से छूने और यौन टिप्पणी करने समेत यौन उत्पीड़न के 12 मामलों में दोषी ठहराया गया था।
पिछले हफ्ते हुई ‘मेडिकल प्रैक्टिशनर्स ट्रिब्यूनल सर्विस’ की सुनवाई के बाद बोस को निलंबित कर दिया गया है और अपील की अवधि पूरी होने के बाद उनका नाम ब्रिटेन की ‘जनरल मेडिकल काउंसिल’ (जीएमसी) की पंजी से आधिकारिक रूप से हटा दिया जाएगा।
उनके जीएमसी के पंजी नोट में कहा गया है, ‘‘इस व्यक्ति (डॉ. अमल कृष्ण बोस) को मेडिकल पंजी से निलंबित कर दिया गया है और वह ब्रिटेन में चिकित्सक के रूप में काम नहीं कर सकते।’’
इसमें कहा गया है, ‘अपील अवधि पूरी होने के बाद इस पंजीकृत चिकित्सक का नाम हटा दिया जाएगा।’
बोस ने आरोपों से इनकार किया था। उनका दावा था कि उनकी हरकतें केवल ‘मजाकिया बातचीत’ और ‘कार्यस्थल की सामान्य हंसी-मजाक’ का हिस्सा थीं। हालांकि, जून 2025 में मुकदमे की सुनवाई पूरी होने के बाद जूरी ने उन्हें दोषी पाया, जिसके बाद ‘प्रेस्टन क्राउन कोर्ट’ ने उन्हें सजा सुनाई।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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