भारत इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में बन रहा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का रणनीतिक केंद्र -भारत ने 2022 से 2027 के बीच निर्यातोन्मुख रणनीतियों को दिया बढ़ावा…

एक बहुराष्ट्रीय कंपनी ने हाल ही में केंद्र सरकार को प्रस्तुत किया कि भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में धीरे-धीरे रणनीतिक अनिवार्यता की ओर बढ़ रहा है, जबकि विश्व अभी भी चीन पर निर्भर है। कंपनी के अनुसार भारत ने 2022 से 2027 के बीच निर्यातोन्मुख रणनीतियों को बढ़ावा दिया है और वैश्विक बाजार के अनुरूप उत्पादन और समन्वय बढ़ाया है। वर्ष 2022 में घरेलू चिप निर्माण के लिए सेमीकंडक्टर मिशन शुरू हुआ। इसके अलावा 2023 में लैपटॉप और सर्वर के स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए आईटी हार्डवेयर प्रोत्साहन योजना 2.0 लागू की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि 2028 के बाद भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र और अधिक निर्यात-केंद्रित और आपूर्ति श्रृंखला में अपरिहार्य बन सकता है। वहीं चीन की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता अभी भी अधिक है। चीन ने 1980 के दशक में वैश्विक ब्रांडों का विनिर्माण शुरू किया, 1990 के दशक में घरेलू कंपनियों का निर्माण किया और 2000 के दशक में श्याओमी, वीवो, ओपो और हुआवेई जैसे ब्रांड वैश्विक स्तर पर उभरे। चीन की प्रतिस्पर्धात्मक ताकत में शून्य आयात शुल्क, तैयार प्लग ऐंड प्ले इन्फ्रास्ट्रक्चर, कम लागत वाली पूंजी और सरकारी अनुदान शामिल हैं। कंपनी का निष्कर्ष है कि भारत की रणनीति धीरे-धीरे और चरणबद्ध रही है, जबकि चीन की नीतियाँ तेज़ और आक्रामक रही हैं। भारत अपने इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण और निर्यात को वैश्विक स्तर पर बढ़ाकर अगले दशक में आपूर्ति श्रृंखला में एक रणनीतिक खिलाड़ी बन सकता है।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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