भरोसेमंद नहीं है अमेरिका, फ्री ट्रेड डील के बावजूद साउथ कोरिया पर लगाया 25 प्रतिशत टैरिफ…

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपनी अमेरिका फर्स्ट नीति के तहत आक्रामक रुख अपनाते हुए दुनिया को हैरान कर दिया है। ट्रंप ने दक्षिण कोरिया (साउथ कोरिया) से होने वाले आयात पर टैरिफ को 15 प्रतिशत से सीधे बढ़ाकर 25 प्रतिशत करने का बड़ा ऐलान किया है। राष्ट्रपति का यह फैसला विशेष रूप से इसलिए चौंकाने वाला है क्योंकि महज कुछ महीने पहले ही दोनों देशों के बीच एक ऐतिहासिक फ्री ट्रेड डील पर सहमति बनी थी। इस कदम से न केवल दक्षिण कोरियाई अर्थव्यवस्था बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों में भी भारी अनिश्चितता पैदा हो गई है।
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस फैसले की जानकारी देते हुए सीधे तौर पर दक्षिण कोरिया की संसद को इस गतिरोध का जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि कोरियाई संसद ने अब तक उस ट्रेड डील को कानूनी रूप से लागू नहीं किया है, जिस पर दोनों देशों के राष्ट्रपतियों के बीच सहमति बनी थी। राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी शर्तों का पालन नहीं होता, अमेरिका ऑटोमोबाइल, लकड़ी, फार्मास्यूटिकल्स और अन्य सभी रेसिप्रोकल टैरिफ मदों पर 25 प्रतिशत शुल्क वसूलेगा।
यह घोषणा उन दावों के विपरीत है जो जुलाई में किए गए थे, जिसमें कहा गया था कि दक्षिण कोरिया अमेरिका में 350 अरब डॉलर का निवेश करेगा और बदले में अमेरिका टैरिफ को घटाकर 15 प्रतिशत पर सीमित रखेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह फैसला घरेलू मोर्चे पर बढ़ते दबाव का परिणाम भी हो सकता है। हालांकि, हालिया शोध और आर्थिक आंकड़े बताते हैं कि इस तरह के आयात शुल्क का बोझ अंततः अमेरिकी उपभोक्ताओं की जेब पर ही पड़ता है, जिससे महंगाई और जीवन-यापन की लागत बढ़ जाती है। इसके बावजूद, ट्रंप टैरिफ को एक रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हट रहे हैं।
दक्षिण कोरिया अमेरिका का एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार है और हर साल अमेरिका वहां से लगभग 150 अरब डॉलर का सामान आयात करता है। ऐसे में 10 प्रतिशत की अतिरिक्त वृद्धि से दोनों देशों के बीच होने वाले व्यापार पर गहरा असर पड़ना तय है। यह पहली बार नहीं है जब अमेरिकी प्रशासन ने इस तरह का यू-टर्न लिया हो। इससे पहले कनाडा, यूरोपीय देशों और स्विट्जरलैंड के साथ भी टैरिफ को लेकर तकरार देखने को मिली है। वैश्विक स्तर पर अब अमेरिकी वादों की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि द्विपक्षीय समझौतों के बाद भी एकतरफा टैरिफ बढ़ाए जाते हैं, तो भविष्य में अन्य देश अमेरिका के साथ दीर्घकालिक व्यापारिक संबंध बनाने से कतरा सकते हैं। फिलहाल, ट्रंप के इन व्यापक टैरिफ अधिकारों की वैधता पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई चल रही है, जिसका फैसला आने वाले हफ्तों में यह तय करेगा कि राष्ट्रपति अपनी व्यापार नीति को किस सीमा तक ले जा सकते हैं।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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