दिल्ली में भारत-चीन के बीच उच्च स्तरीय बैठक; UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता का चीन ने किया समर्थन, सीमा विवाद सुलझाने और सीधी उड़ानें शुरू करने पर बनी सहमति

नई दिल्ल. 11 फरवरी । भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी और चीन के कार्यकारी उप विदेश मंत्री मा झाओक्सू के बीच मंगलवार को नई दिल्ली में एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। ब्रिक्स शेरपा बैठक के सिलसिले में भारत आए चीनी मंत्री के साथ हुई इस चर्चा में द्विपक्षीय संबंधों को फिर से पटरी पर लाने पर जोर दिया गया। सबसे बड़ी सफलता संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों को लेकर मिली, जहाँ चीन ने पहली बार भारत की स्थायी सदस्यता की आकांक्षाओं के प्रति सम्मान और समर्थन का सकारात्मक संकेत दिया है। गलवान घाटी विवाद के बाद दोनों देशों के बीच यह अब तक की सबसे प्रभावी कूटनीतिक बातचीत मानी जा रही है।
बैठक के दौरान दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि वैश्विक स्थिरता के लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति बनाए रखना अनिवार्य है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने सीमा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों को सुलझाने के साथ-साथ कैलाश मानसरोवर यात्रा को पुन: शुरू किए जाने के निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में इस यात्रा का दायरा और अधिक विस्तारित किया जाएगा। दोनों पक्षों ने माना कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बनी साझा समझ को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करना आपसी विश्वास बहाली के लिए आवश्यक है।
आर्थिक और नागरिक संबंधों को मजबूती देने के लिए दोनों देशों ने ‘एअर सर्विस एग्रीमेंट’ को जल्द अंतिम रूप देने पर प्रतिबद्धता जताई है। इसके तहत जल्द ही भारत और चीन के बीच सीधी हवाई सेवाएं बहाल हो सकती हैं। साथ ही, व्यापार, पर्यटन और शैक्षणिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए वीजा प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर भी व्यावहारिक सहमति बनी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार, यह बैठक भविष्य में दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और लोगों के बीच आपसी संपर्क (People-to-People contact) बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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