रायसीना डायलॉग 2026 में अमेरिका का बड़ा ऐलान, भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए बना सबसे भरोसेमंद साथी, तकनीक और व्यापार पर बनी नई रणनीति
राजधानी दिल्ली में आयोजित ‘रायसीना डायलॉग 2026’ के 11वें संस्करण में भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर बड़ी घोषणा हुई है। अमेरिकी उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ ने कहा कि मध्य पूर्व में जारी तनाव और बाधित होती वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के बीच अमेरिका, भारत के लिए ऊर्जा का सबसे “विश्वसनीय वैकल्पिक स्रोत” बनने को तैयार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका भारत की अल्पकालिक और दीर्घकालिक ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पूरी तरह समर्पित है, ताकि भारत को अस्थिर क्षेत्रों पर निर्भर न रहना पड़े।
व्यापार के मोर्चे पर लैंडौ ने भारत और अमेरिका के बीच बन रहे नए समझौते को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के बीच छिपी हुई आर्थिक क्षमताओं को उजागर करेगा। तकनीक के क्षेत्र में उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका को क्रांतिकारी बताते हुए भारत को ‘पैकसिलिका’ (PaxSilica) फ्रेमवर्क में शामिल होने का सुझाव दिया। अमेरिका का मानना है कि आने वाले दशकों में भारत की सफलता सीधे तौर पर अमेरिकी रणनीतिक हितों के अनुरूप है, इसलिए दोनों देश उच्च तकनीक और सुरक्षित सप्लाई चेन पर मिलकर काम करेंगे।
इस वर्ष रायसीना डायलॉग की थीम “संस्कार: मुखरता, सामंजस्य, उन्नति” रखी गई है, जिसमें 110 देशों के 2,700 प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन में पहली बार ‘रायसीना साइंस डिप्लोमेसी इनिशिएटिव’ की शुरुआत हुई, जहाँ दुनिया भर के वैज्ञानिकों और राजनयिकों ने उभरती हुई तकनीकों और वैश्विक सुरक्षा पर मंथन किया। अमेरिकी उप विदेश मंत्री के संबोधन ने यह साफ कर दिया है कि अब वाशिंगटन भारत को केवल एक बाजार नहीं, बल्कि ऊर्जा, आतंकवाद विरोधी अभियान और नौवहन स्वतंत्रता के क्षेत्र में एक अनिवार्य वैश्विक साझेदार मानता है।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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