खत्म हो चुकी लिथियम-आयन बैटरी के पुनर्चक्रण के लिए निजी कंपनी को विज्ञान-प्रौद्योगिकी विभाग से वित्तीय मदद

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के टेक्नोलॉजी विकास बोर्ड (टीडीपी) ने निजी क्षेत्र की फर्म मिनीमाइंस क्लीनटेक सॉल्यूशंस प्राईवेट लिमिटेड को बेकार हो चुकी लिथियम-आयन बैटरी की स्वस्थ तरीके से रीसाइक्लिंग के लिये वित्तीय मदद दी है। यह जानकारी विभाग की ओर से शुक्रवार को जारी एक विज्ञप्ति में दी गयी।
स्वच्छ प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने और ज़रूरी महत्वपूर्ण खनिजों में घरेलू क्षमताओं को मज़बूत करने की सरकार की परिकल्पना के मुताबिक विभाग से सहायता पाने वाली कंपनी की इस परियोजना का मकसद एक देसी, ज़ीरो-डिस्चार्ज, खराब बैटरी की सामग्री की स्वस्थ तरीके से रीसाइक्लिंग और ज़रूरी खनिजों की रिफाइनिंग प्रक्रिया को व्यवसायिक रूप से उपयोग करना है।
इसमें खत्म हो चुकी लिथियम-आयन बैटरी से लिथियम, कोबाल्ट, निकल और मैंगनीज़ के बैटरी-ग्रेड अवयवों को निकाला जाएगा। इस परियोजना से कीमती महत्वपूर्ण खनिजों को निकालने में भारत की क्षमता मज़बूत होने की उम्मीद है। इसकी सफलता से आयात पर निर्भरता कम होगी ।
मिनीमाइंस क्लीनटेक सॉल्यूशंस पुनर्चक्रण इकाई है जो पुरानी लिथियम-आयन बैटरी के लिए पुनर्चक्रण की प्रारंभ से लेकर अंत तक की प्रक्रियाओं का समाधान प्रस्तुत करती है। विभाग ने कहा है कि कंपनी की ब्लैक मास रिकवरी और पोस्ट-प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी कम एनर्जी की खपत, कम से कम उत्सर्जन और अलग करने की उच्च दक्षता है जिसमें सफलता दर 99 प्रतिशत है।
डीएसटी के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा, “एंड-ऑफ-लाइफ बैटरी से ज़रूरी खनिजों को प्राप्त करना और रिफाइनिंग के लिए देसी टेक्नोलॉजी का विकास भारत की ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ प्रौद्योगिकी उद्योग तंत्र को मज़बूत करने के लिए बहुत ज़रूरी है। इस परियोजना के ज़रिए, टीडीबी एक स्वस्थ रीसाइक्लिंग समाधान के वाणिज्यीकरण की मदद कर रहा है जो आयात पर निर्भरता को कम कर सकता है, चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे सकता है। इसके साथ ही यह राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन के उद्येश्यों की प्राप्ति में मदद कर सकता है।”
सियासी मियार की रीपोर्ट
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