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देश का कपड़ा बाजार 15 साल में हुआ तीन गुना

देश का कपड़ा बाजार 15 साल में हुआ तीन गुना

नई दिल्ली, देश का कपड़ा बाजार पिछले 15 साल में तीन गुना होकर लगभग 15 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है।

कपड़ा मंत्रालय द्वारा सोमवार को जारी “घरेलू वस्त्र मांग पर अध्ययन रिपोर्ट: कपड़ा एवं वस्त्र बाजार पर राष्ट्रीय परिवार सर्वेक्षण 2024” के अनुसार, पिछले 15 साल में कपड़ों की घरेलू मांग में मजबूत वृद्धि हुई है और इसका बाजार 2010 के 4.89 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2024 में 14.95 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। इस प्रकार इसमें औसतन 8.3 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गयी है।

मंत्रालय के अंतर्गत टेक्सटाइल्स कमेटी द्वारा किए गए अध्ययन पर आधारित इस रिपोर्ट के अनुसार, कुल बाजार आकार में घरेलू क्षेत्र का योगदान 2010 में 4.18 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर साल 2024 में 8.77 लाख करोड़ रुपये हो गया, जिसने देश में कपड़ों की मांग को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

रिपोर्ट में यह भी पता चला है कि पिछले 15 साल में पुरुषों की जींस और महिलाओं के लेगिंग्स की मांग सबसे तेजी से बढ़ी है। साथ ही एक गौर करने वाली बात यह है कि तकनीकी वस्त्रों की इस्तेमाल शहरों के मुकाबले ग्रामीण इलाकों में अधिक होता है।

केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने आज यह रिपोर्ट जारी की। इस अवसर पर वस्त्र सचिव नीलम शमी राव तथा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। रिपोर्ट के अनुसार, 15 साल में कपड़ों की प्रति व्यक्ति मांग 2,119 रुपये से बढ़कर 6,066 रुपये पर पहुंच गयी जो 7.8 प्रतिशत की औसत वार्षिक वृद्धि दर दर्शाता है।

कुल मांग में मानव निर्मित और मिश्रित रेशों पर आधारित उत्पादों का योगदान 52.2 प्रतिशत है, जबकि कपास आधारित उत्पादों का योगदान 41.2 प्रतिशत है। वहीं, रेशम और ऊनी उत्पाद क्रमशः 5.2 प्रतिशत और 1.3 प्रतिशत का योगदान देते हैं।

मानव निर्मित और मिश्रित रेशों से बने वस्त्रों की मांग में सबसे अधिक वृद्धि हुई है, यह 1.47 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 4.47 लाख करोड़ रुपये हो गयी। इसमें 8.28 प्रतिशत की औसत वार्षिक वृद्धि दर्ज की गयी है। कपास ने दूसरे सबसे महत्वपूर्ण रेशे के रूप में अपनी स्थिति बनाये रखी है। मूल्य के आधार पर इसकी मांग 0.87 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 3.53 लाख करोड़ रुपये हो गयी। इसकी वृद्धि दर दहाई अंक में 10.53 प्रतिशत रही। इसी अवधि में रेशम और ऊनी उत्पादों की मांग क्रमशः 8.93 प्रतिशत और 7.02 प्रतिशत की औसत दर से बढ़ी।

अध्ययन में पता चला है कि महिलाओं ने कुल वस्त्र खरीद में 55.5 प्रतिशत का योगदान दिया, जबकि पुरुषों का योगदान 44.5 प्रतिशत रहा। घरेलू बाजार में शर्ट, साड़ी, पतलून, सलवार-कमीज, पुरुषों की जींस, टी-शर्ट, महिलाओं के ड्रेस मटेरियल, शर्टिंग, धोती, बनियान और अंडरवियर जैसे उत्पादों की मांग सबसे अधिक रही। पुरुषों की जींस सबसे तेजी से बढ़ने वाली श्रेणी के रूप में उभरी, जबकि महिलाओं के बीच लेगिंग्स एक पसंदीदा उत्पाद रहा।

घरेलू उपभोग में तकनीकी वस्त्रों का उपयोग बढ़ने के भी संकेत मिले हैं। मास्क, सैनिटरी नैपकिन, बैंडेज कपड़ा, टेंट, सीट कवर फैब्रिक, वाइप्स, डायपर, कार सीट कवर और सर्जिकल डिस्पोजेबल जैसे उत्पादों की मांग ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बढ़ी है। ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी वस्त्रों की खपत लगभग 58 प्रतिशत है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह लगभग 42 प्रतिशत है।

सियासी मियार की रीपोर्ट