विदेश मंत्री जयशंकर सूरीनाम पहुंचे, शीर्ष नेतृत्व के साथ करेंगे द्विपक्षीय वार्ता

पारामारिबो, भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर बुधवार को अपनी तीन-देशों की यात्रा के दूसरे चरण में सूरीनाम पहुंचे, जहां उनके समकक्ष मेल्विन बोउवा ने उनका स्वागत किया।
एस. जयशंकर ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “अपनी सूरीनाम की पहली यात्रा पर पारामारिबो पहुंच गया हूं। विदेश मंत्री मेल्विन बुवा की ओर से व्यक्तिगत रूप से स्वागत किए जाने से मैं सचमुच अभिभूत हूं। कल (गुरुवार) होने वाली हमारी बातचीत का बेसब्री से इंतजार है।”
एक अन्य पोस्ट में विदेश मंत्री ने लिखा, “सूरीनाम में भारत किसी दूर के साझेदार को नहीं देखता, बल्कि भारत वहां अपना परिवार देखता है। जब हम भविष्य की ओर देखते हैं, तो यह स्थायी संबंध हमें बहुआयामी सहयोग को और गहरा करने के लिए प्रेरित करता रहेगा।”
इस अवसर पर एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर ‘टाइम्स ऑफ सूरीनाम’ अखबार में छपा अपना लेख भी शेयर किया है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, एस. जयशंकर दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अपनी यात्रा के दौरान सूरीनाम के नेतृत्व के साथ कई द्विपक्षीय वार्ताएं करेंगे। इसके बाद वे त्रिनिदाद और टोबैगो की यात्रा भी करेंगे। इससे पहले, उन्होंने जमैका का दौरा किया था।
जमैका की अपनी पहली द्विपक्षीय यात्रा के दौरान, जो किसी भी भारतीय विदेश मंत्री की पहली ऐसी यात्रा थी, उन्होंने इस कैरेबियाई राष्ट्र को 10 ‘भीष्म’ आपातकालीन चिकित्सा इकाइयां भी सौंपीं। जयशंकर ने जमैका के प्रधानमंत्री एंड्रयू होल्नेस से भी मुलाकात की।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि इन देशों का भारत के साथ एक विशेष जुड़ाव है, जिसका मुख्य कारण वहां ‘गिरमिटिया’ समुदायों की उपस्थिति है।
‘गिरमिटिया’ वे भारतीय मजदूर थे, जिन्होंने 19वीं सदी के मध्य से लेकर अंत तक ब्रिटिश उपनिवेशों में काम करने के लिए भारत छोड़ा था और जहां उनमें से कई लोग अंततः बस गए। ‘गिरमिट’ शब्द असल में ‘एग्रीमेंट’ (समझौते) का ही एक रूप है। यह उस अनुबंध के बारे में बताता है, जिसके तहत इन मजदूरों ने प्रवास किया था।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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