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तुर्की का भारत की ओर बढ़ा दोस्ती का हाथ: पाकिस्तान पर निर्भरता कम कर अंकारा ने बदली रणनीति

तुर्की का भारत की ओर बढ़ा दोस्ती का हाथ: पाकिस्तान पर निर्भरता कम कर अंकारा ने बदली रणनीति

नई दिल्ली, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहाँ तुर्की अब भारत के साथ अपने संबंधों को पाकिस्तान के चश्मे से देखना बंद करने की ओर अग्रसर है। तुर्की के विदेश मंत्री हकान फिदान के बयानों से संकेत मिलते हैं कि अंकारा अब भारत के साथ एक व्यावहारिक और लाभदायक साझेदारी स्थापित करना चाहता है। भारत की सक्रिय कूटनीति और ग्रीस व साइप्रस जैसे देशों के साथ बढ़ती रणनीतिक साझेदारी ने तुर्की को अपनी पुरानी नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है।
आर्थिक संकट और व्यापारिक दबाव

तुर्की की इस नई रणनीति के पीछे का सबसे बड़ा कारण उसका गहराता आंतरिक आर्थिक संकट है। अंकारा को यह भय सता रहा है कि भारत के साथ बिगड़ते संबंध उसकी कंपनियों के लिए भारी व्यापारिक नुकसान का कारण बन सकते हैं। इसीलिए, तुर्की अब अपनी विदेश नीति में ‘लेन-देन’ पर आधारित दृष्टिकोण अपना रहा है, ताकि वह भारत के विशाल बाजार का लाभ उठा सके और अपनी कॉर्पोरेट संपत्तियों को संभावित आर्थिक प्रतिबंधों या कड़े व्यापारिक कदमों से सुरक्षित रख सके।
भारत की सतर्कता और भविष्य

तुर्की के बदले हुए सुरों के बावजूद, भारत अपनी विदेश नीति में अत्यधिक सतर्कता बरत रहा है। नई दिल्ली का स्पष्ट मानना है कि वास्तविक संबंध केवल वार्ता से नहीं, बल्कि एक-दूसरे की सुरक्षा और राष्ट्रीय संवेदनशीलता का सम्मान करने से बनते हैं। जब तक तुर्की द्वारा पाकिस्तान को दी जा रही सैन्य मदद और भारत विरोधी रुख पूरी तरह बंद नहीं होता, तब तक भारत संबंधों को पूर्णतः सामान्य करने की जल्दबाजी में नहीं है और हर कदम फूंक-फूंक कर रख रहा है।

सियासी मियार की रीपोर्ट