राष्ट्रपति ने आईटीडीपी भैंसदेही को राष्ट्रीय सम्मान से नवाजा

राष्ट्रपति ने आईटीडीपी भैंसदेही को राष्ट्रीय सम्मान से नवाजा

बैतूल/नई दिल्ली, 05 जून मध्यप्रदेश के बैतूल जिले की एकीकृत जनजातीय विकास परियोजना (आईटीडीपी) भैंसदेही को जनजातीय क्षेत्रों में उत्कृष्ट विकास कार्यों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है।

नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित नेशनल कॉन्क्लेव-2026 में राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने आईटीडीपी भैंसदेही को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए पांच लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की। यह सम्मान एकीकृत जनजातीय विकास परियोजनाओं के सुदृढ़ीकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिए दिया गया। परियोजना की ओर से सहायक आयुक्त एवं प्रभारी परियोजना प्रशासक विवेक कुमार पाण्डेय ने सम्मान ग्रहण किया।

इस उपलब्धि पर केंद्रीय मंत्री दुर्गादास उईके, जनजातीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव तथा बैतूल कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे ने परियोजना दल को बधाई दी। आईटीडीपी भैंसदेही ने भैंसदेही, भीमपुर और आठनेर विकासखंडों के 231 जनजातीय बहुल गांवों में अभिसरण आधारित विकास मॉडल को प्रभावी रूप से लागू किया है। परियोजना के अंतर्गत आधारभूत संरचना, आजीविका, सामाजिक कल्याण और सुशासन से जुड़े कार्यों को एकीकृत रूप से संचालित किया गया।

धरती आबा अभियान, आदि कर्मयोगी अभियान तथा जनजातीय कार्य विभाग की विभिन्न योजनाओं के समन्वित क्रियान्वयन के माध्यम से आवास, पेयजल, सड़क संपर्क और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की गई हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत तीनों विकासखंडों में 5,112 आवास स्वीकृत किए गए हैं, जबकि जल जीवन मिशन के माध्यम से 46 हजार से अधिक जनजातीय परिवारों को पेयजल सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

आजीविका संवर्धन के क्षेत्र में प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत 139 कारीगरों को लाभ के लिए स्वीकृति दी गई है। वहीं किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड, सिंचाई उपकरण और कृषि प्रदर्शन जैसी सुविधाएं प्रदान की गई हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत 1,992 गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं का पंजीकरण किया गया।

साथ ही प्रायोजन एवं बाल आशीर्वाद योजनाओं के माध्यम से जरूरतमंद बच्चों को सहायता उपलब्ध कराई गई। क्षेत्र के 362 आंगनवाड़ी केंद्रों के उन्नयन का कार्य भी किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार सामुदायिक भागीदारी और जवाबदेह प्रशासन पर आधारित यह मॉडल जनजातीय विकास के क्षेत्र में देश के लिए एक उदाहरण के रूप में उभरा है।

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