ट्रम्प से मिलेंगे लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन, सेना हटाने को लेकर इज़रायल पर दबाव बनाने की कोशिश
वाशिंगटन । लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिलेंगे। इस दौरान वह ईरान समर्थित हिजबुल्लाह समूह के हथियार खत्म करने की योजना पेश करेंगे। साथ ही इज़रायल पर दक्षिणी लेबनान से अपनी सेना हटाने का दबाव बनाने के लिए अमेरिका से आग्रह करेंगे।
श्री जोसेफ औन शनिवार को चार दिन की आधिकारिक यात्रा पर वांशिंगटन पहुंचे और मंगलवार को व्हाइट हाउस में श्री ट्रंप से उनकी मुलाकात तय है। लगभग 20 वर्षों में किसी लेबनानी राष्ट्राध्यक्ष की व्हाइट हाउस की यह पहली यात्रा है। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब लेबनान को दक्षिण के कुछ हिस्सों में इज़रायली सेना की लगातार मौजूदगी, नागरिकों के लंबे समय से विस्थापन और हिजबुल्लाह के भविष्य को लेकर राजनीतिक मतभेदों का सामना करना पड़ रहा है।
लेबनान से अमेरिका रवाना होने से श्री जोसेफ औन ने कहा था कि वह श्री ट्रम्प से इज़रायल पर ज़रूरी दबाव डालने के लिए कहेंगे ताकि 26 जून को हुए उस अमेरिकी-मध्यस्थता वाले समझौते को लागू किया जा सके, जिसमें हिज़्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण, इज़रायल की चरणबद्ध वापसी और दोनों देशों के बीच ज़्यादा स्थिर संबंधों के लिए एक रूपरेखा की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि श्री ट्रम्प के पास इज़रायल को अपनी वापसी पूरी करने और लेबनान को पूरी संप्रभुता बहाल करने में मदद करने के लिए ज़रूरी ताकत है।
श्री ट्रम्प के साथ अपनी बैठक से पहले लेबनान के राष्ट्रपति ने वाशिंगटन में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ बातचीत की। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार श्री रुबियो ने लेबनान की संप्रभुता को फिर से हासिल करने, हिज़्बुल्लाह को निरस्त्र करने, उसके आतंकवादी बुनियादी ढांचे को खत्म करने और शांति की दिशा में आगे बढ़ने के लेबनान के दृढ़ प्रयासों की सराहना की।
बैठक के बारे में जारी जानकारी के अनुसार अमेरिका के विदेश विभाग में हुई इस बैठक में अमेरिका -इज़रायल-लेबनान के बीच तीन-पक्षीय ढांचे पर चर्चा हुई। श्री रुबियो ने तीन-पक्षीय ढांचे को सफलतापूर्वक लागू करने और लेबनान के लोगों के लिए शांति, आर्थिक सुधार और बेहतर भविष्य लाने की लेबनान की कोशिशों का समर्थन करने के लिए वाशिंगटन की प्रतिबद्धता को दोहराया।
व्हाइट हाउस में यह बैठक जून के फ्रेमवर्क समझौते को लागू करने के लिए इटली के रोम में लेबनान और इज़रायल के अधिकारियों के बीच अमेरिकी मध्यस्थता वाली बातचीत के बाद हुई है। इज़रायल ने कहा है कि जब तक हिज़्बुल्लाह के हथियार नहीं हटाए जाते, तब तक वह अपनी सेना को वापस नहीं बुलाएगा, जबकि हिज़्बुल्लाह ने इज़रायल के साथ सीधी बातचीत और अपने हथियार छीनने की कोशिशों को खारिज कर दिया है।
लेबनान की अमेरिकी-समर्थित सेना के पूर्व कमांडर श्री जोसेफ औन को पिछले साल राष्ट्रपति चुना गया था। लेबनान में दो साल से ज़्यादा समय तक कोई राष्ट्राध्यक्ष नहीं था। उनका राष्ट्रपति बनना हिज़्बुल्लाह के खिलाफ़ इज़रायल के 2024 के हमले और सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद के सत्ता से हटने के बाद बदलते राजनीतिक हालात को दिखाता है। इन घटनाओं ने ईरान-समर्थित समूह को कमज़ोर कर दिया था।
श्री जोसेफ औन ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में देश में हथियारों पर सरकार का एकाधिकार बहाल करने का वादा किया था और हिज़्बुल्लाह के हथियार हटाने को अपने राष्ट्रपति कार्यकाल का मुख्य लक्ष्य बनाया। बयान के अनुसार, श्री रुबियो ने श्री जोसेफ औन के रुख और उनके द्वारा उठाए गए कदमों का समर्थन किया, जिनका मकसद पूरे इलाके पर लेबनान की संप्रभुता बहाल करना, तीन-पक्षीय ढांचे को लागू करना और आर्थिक समृद्धि लाकर तथा पूरे देश में सरकारी अधिकार बढ़ाकर लेबनान की भूमिका को फिर से मज़बूत करना है।
श्री रुबियो ने कहा, “लेबनान को किसी दूसरी बातचीत प्रक्रिया से नहीं जोड़ा जा सकता।” जाहिर तौर पर उनका इशारा अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की ओर था। उन्होंने आगे कहा, “लेबनान की संप्रभुता का इस्तेमाल केवल देश की संवैधानिक संस्थाओं द्वारा लिए गए लेबनानी फैसले के ज़रिए ही किया जा सकता है।”
सियासी मियार की रीपोर्ट
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