दवाओं के नाम व जांचें हिंदी में लिखें चिकित्सक: बृजेश पाठक

लखनऊ, 25 सितंबर । उत्तर प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याणमंत्री और उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने राज्य के सभी चिकित्सकों से दवाओं और जांचों के नाम हिंदी अथवा देवनागरी में लिखने की अपील की है।
उपमुख्यमंत्री ने चिकित्सकों को लिखे पत्र में स्पष्ट किया कि वे निजी स्तर पर उन दवाओं को प्राथमिकता देंगे जिनके नाम हिंदी में लिखे होंगे। हिंदी में काम करने वाले चिकित्सकों को सम्मानित भी किया जाएगा। पत्र में कहा गया है कि लोक-भाषा (क्षेत्रीय भाषा) में काम करने से मरीजों का विश्वास हमारी चिकित्सा प्रणाली पर और अधिक बढ़ेगा। उन्होंने डॉक्टरों से अपील की, कि यदि वे मरीजों से उनकी मातृभाषा (जैसे भोजपुरी, अवधी आदि) में संवाद करेंगे तो मरीज अपनी बीमारी और इलाज को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे और डॉक्टरों पर उनका विश्वास कई गुना बढ़ जाएगा।
बृजेश पाठक ने एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर पत्र में लिखा कि लोकतन्त्र हमेशा लोक लाज और लोक भाषा से मजबूत होता है। राष्ट्रीय एकता हिन्दी और अन्य भारतीय भाषाओं को मजबूत करने से स्वतः सशक्त होगी। इसलिए नेता जी सुभाष चन्द्र बोस ने आजाद हिन्द सरकार की राष्ट्रीय भाषा हिन्दी घोषित किया था। गुजराती मूल के पूज्य दयानन्द सरस्वती हिन्दी के प्रचार में जीवन पर्यन्त-यायावर रहे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विदेशों में भी हिन्दी व भारतीय भाषाओं में ही जन संवाद करते हैं। हमें इन महा पुरुषों, उनके कार्यों और उनकी सम्यक सोच से प्रेरणा लेनी चाहिए।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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