फ्लेक्सी कैप फंड: लंबी अवधि का प्रदर्शन क्यों है अहम?
- बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच निवेश का लचीला विकल्प

नई दिल्ली, 26 सितंबर । शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच फ्लेक्सी कैप फंड निवेशकों के बीच चर्चा में हैं। ये फंड मैनेजरों को बाजार की परिस्थितियों के अनुसार बड़ी, मझोली और छोटी कंपनियों में निवेश का अनुपात बदलने की सुविधा देते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ एक साल के रिटर्न को देखकर इन फंडों में निवेश का फैसला लेना ठीक नहीं है, बल्कि लंबी अवधि के प्रदर्शन और जोखिम को समझना आवश्यक है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक बैंक ऑफ इंडिया फ्लेक्सी कैप डायरेक्ट ने एक साल में 10.77 फीसदी का रिटर्न दिया, लेकिन तीन साल में 19.35 फीसदी और पांच साल में 16.39 फीसदी का प्रभावशाली रिटर्न दिखाया। वहीं, क्वांट फ्लेक्सी कैप डायरेक्ट का एक साल का रिटर्न 10.22 फीसदी था, जबकि लंबी अवधि में यह भी बेहतर रहा। ये आंकड़े बताते हैं कि अल्पकालिक और दीर्घकालिक प्रदर्शन में अंतर हो सकता है। बड़ौदा बीएनपी पारिबास म्यूचुअल फंड के फंड मैनेजर के अनुसार फ्लेक्सी कैप जैसे डायवर्सिफाइड इक्विटी फंड का आकलन तीन से पांच साल की अवधि में करना अधिक उपयोगी है। केवल पॉइंट-टू-पॉइंट के बजाय रोलिंग रिटर्न भी देखना चाहिए। फंड चुनते समय जोखिम-समायोजित रिटर्न (जैसे स्टैंडर्ड डिविएशन) पर भी ध्यान देना जरूरी है। इसके साथ ही, फंड की निवेश शैली, मार्केट कैप में हिस्सेदारी और किसी एक सेक्टर या शेयर में अत्यधिक एकाग्रता भी देखनी चाहिए, क्योंकि पिछला प्रदर्शन भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं देता।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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