आईसीसी न्यायाधीशों पर प्रतिबंध लगाने का मामला, ईरान ने अमेरिकी फैसले की निंदा की
तेहरान, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माईल बाघेई ने अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय (आईसीसी) के न्यायाधीशों पर प्रतिबंध लगाने के अमेरिका के हाल में लिए गए फैसले की निंदा की है। उन्होंने कहा कि यह अमेरिका की विदेश नीति का ‘नया निम्न स्तर’ है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एस्माईल बाघेई ने लिखा, “अमेरिका ने आईसीसी जजों के खिलाफ प्रतिबंध लगाने का फैसला न्यायाधिकरण के उस फैसले के बाद लिया जिसमें इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था। वहीं इससे पहले अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों के कथित युद्ध अपराध का मामला खोलने की बात भी थी।”
बाघेई ने कहा कि अमेरिकी सरकार के न्यायिक आदेश का पालन करने के लिए आईसीसी के न्यायाधीशों और कार्मिकों पर प्रतिबंध लगाने और उन्हें परेशान करने की कार्रवाई निम्न स्तर की है। यहां अमेरिकी विदेश नीति का भी निम्न स्तर है, जो अपनी विदेश नीति को बलपूर्वक और धमकी के माध्यम से आगे बढ़ाने में बुरी तरह से आदी है।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक बाघेई ने कहा, “अमेरिका अपनी शक्ति का दुरुपयोग जारी रखे हुए है।”
उनके इस बयान को बुधवार को गाजा में ‘नरसंहार’ रोकने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के खिलाफ वाशिंगटन के मतदान से जोड़ा जा रहा है।
बाघेई ने कहा कि आईसीसी न्यायाधीशों की मंजूरी ने संयुक्त राज्य अमेरिका को ‘गाजा में इजरायली अपराधों’ में सबसे ‘स्थायी और लगातार सहयोगी’ बना दिया है।
उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से गाजा में हो रही बर्बरता का विरोध करने का आग्रह किया, जो अंतर्राष्ट्रीय कानून के पूरे ढांचे को हिला रही है और मानवता के मूल सिद्धांतों को अस्थिर कर रही है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के एक बयान के अनुसार, वाशिंगटन ने युगांडा के सोलोमी बालुंगी बोसा, पेरू के लूज डेल कारमेन इबानेज कैरान्जा, बेनिन के रेइन एडिलेड सोफी अलापिनी गांसौ और स्लोवेनिया की बेटी होहलर पर प्रतिबंध लगाया है।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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