मिथक से परे एक नई सोच की फैंटेसी ड्रामा फिल्म है राहु केतु : सूरज सिंह

बी-लाइव प्रोडक्शन के सह-संस्थापक और निर्माता सूरज सिंह का कहना है कि उनकी आने वाली फिल्म राहु केतु मिथक से परे एक नई सोच की फैंटेसी ड्रामा फिल्म है।
जिस दौर में फैंटेसी फिल्मों को अक्सर पौराणिक कथाओं या धार्मिक संदर्भों से जोड़कर देखा जाता है, उसमें ‘राहु केतु’ जानबूझकर एक ऐसी राह चुनती है, जहां उसकी कहानी किसी मिथकीय कथा या धार्मिक पुनर्कथन पर आधारित नहीं, बल्कि कल्पना, विश्वास प्रणालियों और मानवीय टकरावों से प्रेरित हो। इसे एक न्यू-एज फैंटेसी ड्रामा भी कहा जा सकता है। फिल्म ‘राहु केतु’ में फैंटेसी को प्रतीकात्मक सहारे की तरह नहीं, बल्कि कहानी कहने के एक सशक्त माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया गया है।
सूरज सिंह ने कहा,“राहु केतु एक फैंटेसी ड्रामा है, जो विचारों से प्रेरित है, लेकिन मिथक से बंधा नहीं है। हालांकि हम शुरू से ही यह बात साफ रखना चाहते थे कि हम किसी धार्मिक कहानी को दोहराना नहीं चाहते, बल्कि इस फिल्म को फैंटेसी के जरिए विश्वास प्रणालियों और मानवीय टकरावों को एक समकालीन, भावनात्मक और सार्वभौमिक अंदाज़ में पेश करना चाहते हैं।”
निर्माता ने कहा, “फैंटेसी हमें डर, शक्ति, आस्था और चुनाव जैसे विषयों पर बात करने की आज़ादी देती है, लेकिन ऐसे किरदारों और परिस्थितियों के जरिए, जिनसे दर्शक भावनात्मक रूप से जुड़ सकें। अपने मूल में, राहु केतु एक मानवीय कहानी है, जिसे कल्पनाशील दृष्टि से कहा गया है।”
सियासी मियार की रीपोर्ट
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