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काशी के मणिकर्णिका घाट का हो रहा भव्य कायाकल्प : प्रशासन ने जारी की 3D तस्वीरें, अंतिम संस्कार की व्यवस्था होगी आधुनिक और सुगम

काशी के मणिकर्णिका घाट का हो रहा भव्य कायाकल्प : प्रशासन ने जारी की 3D तस्वीरें, अंतिम संस्कार की व्यवस्था होगी आधुनिक और सुगम

वाराणसी, 17 जनवरी । काशी की आत्मा माने जाने वाले मणिकर्णिका घाट के कायाकल्प की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। वाराणसी प्रशासन ने घाट के पुनर्विकास से जुड़ी 3D तस्वीरें जारी की हैं, जिनमें मणिकर्णिका घाट का नया और सुव्यवस्थित स्वरूप साफ दिखाई देता है। इस परियोजना का सबसे अहम उद्देश्य दाह-संस्थान का आधुनिकीकरण करते हुए अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों को सुरक्षित, सम्मानजनक और सुगम सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने काशी के ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट के आधुनिकीकरण की जिम्मेदारी रूपा फ़ाउंडेशन को सौंपी है। यह कार्य चरण-1, चरण-2 और चरण-4 के तहत युद्धस्तर पर किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि परियोजना को तय समय में पूरा करने के लिए निर्माण कार्य लगातार गति पकड़ रहा है।

आस्था से समझौता नहीं, संरक्षण के साथ विकास
मणिकर्णिका घाट न केवल दाह-स्थल है, बल्कि यह धार्मिक और ऐतिहासिक आस्था का केंद्र भी है। इसी कारण पुनर्विकास के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा जा रहा है कि प्राचीन दाह-घाट और आसपास स्थित ऐतिहासिक मंदिरों को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे। निर्माण कार्य पूरी तरह से संरक्षण की भावना के साथ किया जा रहा है, ताकि सदियों पुरानी परंपरा अक्षुण्ण बनी रहे।

38 दाह-चिता स्थलों का नवीनीकरण
परियोजना के तहत घाट पर मौजूद 38 दाह-चिता स्थलों का नवीनीकरण किया जाएगा। इसके साथ ही आधुनिक चिमनियां लगाई जाएंगी, जिससे धुएं और अव्यवस्था की समस्या कम होगी। इससे न केवल पर्यावरणीय स्थिति बेहतर होगी, बल्कि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया भी अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनेगी।

परिजनों और श्रद्धालुओं के लिए नई सुविधाएं
अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए घाट पर एप्रोच रैम्प, प्रतीक्षालय और व्यूइंग गैलरी का निर्माण किया जाएगा। इससे बुजुर्गों, महिलाओं और दूर-दराज से आने वाले परिजनों को काफी राहत मिलेगी और उन्हें घंटों खड़े रहने की मजबूरी से निजात मिलेगी।

महाकालेश्वर मंदिर के आसपास विशेष धार्मिक स्थल
परियोजना में महाकालेश्वर मंदिर के आसपास प्रार्थना और पूर्व-संस्कार के लिए एक विशेष स्थान विकसित करने की योजना है। इससे अंतिम संस्कार से पहले की धार्मिक क्रियाएं एक व्यवस्थित और शांत वातावरण में संपन्न हो सकेंगी।

धार्मिक मान्यताओं का पूरा सम्मान
मणिकर्णिका घाट को माता सती का कुंडल गिरने से पवित्र माना जाता है। इस गहरी धार्मिक मान्यता को ध्यान में रखते हुए पूरे पुनर्विकास में आस्था और परंपरा का विशेष ख्याल रखा जा रहा है। किसी भी निर्माण से धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे, यह परियोजना की मूल शर्तों में शामिल है।

लकड़ी ढुलाई से लेकर पेयजल तक बेहतर इंतजाम
घाट पर लकड़ी ढुलाई के लिए अलग रैम्प बनाया जाएगा, जिससे अव्यवस्था कम होगी। इसके अलावा पंजीकरण कार्यालय, स्वच्छ पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं की भी उत्तम व्यवस्था की जाएगी। इससे अंतिम संस्कार से जुड़ी तमाम औपचारिकताएं आसान हो सकेंगी।

प्राचीन विरासत का सम्मानजनक पुनर्स्थापन
खुदाई के दौरान यदि कोई प्राचीन मूर्ति या ऐतिहासिक अवशेष मिलते हैं, तो उन्हें नष्ट नहीं किया जाएगा। ऐसे सभी अवशेषों को नए ढांचों में सम्मान के साथ पुनः स्थापित किया जाएगा, ताकि काशी की विरासत सुरक्षित रहे।

आधुनिकता और परंपरा का संगम
मणिकर्णिका घाट का यह कायाकल्प केवल निर्माण कार्य नहीं, बल्कि काशी की परंपरा और आधुनिक व्यवस्था के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है। प्रशासन का मानना है कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद मणिकर्णिका घाट न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि सुविधा और व्यवस्था के लिहाज से भी देश के सबसे आदर्श दाह-घाटों में शामिल होगा।

सियासी मियार की रीपोर्ट