दक्षिण चीन के स्कूल में नोरोवायरस संक्रमण से 100 से ज्यादा छात्र बीमार

बीजिंग, 18 जनवरी । दक्षिणी चीन के गुआंग्डोंग प्रांत के फोशान शहर में स्थित एक सीनियर हाई स्कूल के 103 छात्र नोरोवायरस से संक्रमित पाए गए हैं। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। राहत की बात यह है कि इनमें से किसी भी छात्र की हालत गंभीर नहीं है और न ही किसी की मौत हुई है।
नोरोवायरस एक आम वायरस है जो तीव्र पेट की बीमारी (गैस्ट्रोएंटेराइटिस) का कारण बनता है। इससे संक्रमित होने पर आमतौर पर उल्टी और दस्त की शिकायत होती है। शिंगहुई मिडिल स्कूल के ये छात्र हाल ही में बीमार पड़े थे और शुरुआती जांच में उनकी बीमारी का कारण नोरोवायरस संक्रमण ही पाया गया।
सभी 103 छात्रों की स्थिति अब स्थिर है। स्कूल परिसर को पूरी तरह से कीटाणुरहित किया गया है। छात्रों की सेहत पर लगातार नजर रखी जा रही है और उनकी उपस्थिति की नियमित जांच की जा रही है। एक एपिडेमियोलॉजिकल सर्वे भी चल रहा है।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, गुआंग्डोंग प्रांत के रोग नियंत्रण विभाग ने जानकारी दी कि यहां हर साल अक्टूबर से अगले साल मार्च तक नोरोवायरस का प्रकोप अधिक रहता है।
नोरोवायरस वायरस का एक समूह है जो तेज उल्टी और दस्त का कारण बनता है। यह बीमारी बहुत आम है और तेजी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलती है। ठंडे महीनों में इसके फैलने की संभावना ज्यादा रहती है। अमेरिका में इसे भोजन से फैलने वाली बीमारियों का सबसे बड़ा कारण माना जाता है।
अनुमान है कि सालाना 685 मिलियन नोरोवायरस के मामले देखे जाते हैं, जिनमें 5 साल से कम उम्र के बच्चों में 200 मिलियन मामले शामिल हैं। यह बीमारी हर साल करीब 2 लाख लोगों की जान लेती है, जिनमें लगभग 50 हजार बच्चे शामिल हैं। इसका असर सबसे ज्यादा गरीब देशों में देखा जाता है। स्वास्थ्य देखभाल लागत और आर्थिक नुकसान के परिणामस्वरूप नोरोवायरस की वैश्विक लागत 60 बिलियन डॉलर होने का अनुमान है।
नोरोवायरस का पहला बड़ा प्रकोप वर्ष 1968 में अमेरिका के नॉरवॉक शहर के एक स्कूल में सामने आया था। इसी वजह से इस वायरस की पहली पहचान “नॉरवॉक वायरस” के नाम से हुई।
नोरोवायरस पेट की बीमारी पैदा करता है, जिसे कई लोग गलत तरीके से “पेट का फ्लू” कह देते हैं, जबकि असली फ्लू सांस से जुड़ी बीमारी होती है, पेट से नहीं।
आमतौर पर भूमध्य रेखा के ऊपर वाले देशों में नोरोवायरस का प्रकोप नवंबर से अप्रैल के बीच ज्यादा होता है, जबकि भूमध्य रेखा के नीचे वाले देशों में यह अप्रैल से सितंबर के बीच फैलता है। वहीं, जो देश भूमध्य रेखा के आसपास स्थित हैं, वहां इसके फैलने का कोई तय मौसम नहीं होता।
सियासी मियार की रीपोर्ट
Siyasi Miyar | News & information Portal Latest News & Information Portal