डीपीडीपी एक्ट जल्द लागू होगा, बड़ी कंपनियों के लिए घट सकती है समय-सीमा

नई दिल्ली, 24 जनवरी । डिजिटल व्यक्तिगत डेटा सुरक्षा अधिनियम (डीपीडीपी ऐक्ट) के तहत प्रमुख डेटा फिड्यूशियरी (सिग्निफिकेंट डेटा फिड्यूशियरी-एसडीएफ) के लिए निर्धारित कुछ प्रशासनिक प्रावधानों को लागू करने की समय-सीमा कम की जा सकती है। सूत्रों के अनुसार इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (आईटी मंत्रालय) इस अवधि को मौजूदा 18 महीनों से घटाकर 12 महीने करने पर विचार कर रहा है। यह प्रस्ताव मंगलवार को हितधारकों के साथ हुई एक बैठक में रखा गया। इस श्रेणी में मेटा, गूगल, अमेज़न और माइक्रोसॉफ्ट जैसी वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ-साथ लगभग सभी बड़े बैंक, वित्तीय संस्थान और बीमा कंपनियां शामिल होंगी। सूत्रों का कहना है कि उद्योग इस प्रस्ताव का विरोध कर सकता है, क्योंकि भारतीय उपयोगकर्ताओं के डेटा से जुड़ी जटिलताओं को देखते हुए कंपनियां पहले ही समय-सीमा बढ़ाने की मांग कर रही थीं। उद्योग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि समय-सीमा को लगभग एक तिहाई तक घटाने का प्रस्ताव न केवल हमारे लिए बल्कि भारत में काम करने वाले किसी भी डेटा फिड्यूशियरी के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होगा। इस संबंध में आईटी मंत्रालय से अब तक कोई जवाब नहीं मिला। डीपीडीपी ऐक्ट के तहत केंद्र सरकार विभिन्न कारकों के आकलन के आधार पर किसी भी कंपनी या इंटरनेट मध्यस्थ को एसडीएफ घोषित कर सकती है। इन कारकों में प्रोसेस किए जाने वाले व्यक्तिगत डेटा की मात्रा और संवेदनशीलता, उपयोगकर्ताओं के अधिकारों को होने वाला जोखिम, भारत की संप्रभुता एवं अखंडता, चुनावी लोकतंत्र, राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था पर संभावित प्रभाव शामिल हैं।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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