निखिल सिद्धार्थ एक भारतीय सम्राट के जीवन पर आधारित ‘स्वयंभू’ को लेकर हैं उत्साहित

नई दिल्ली, 14 फरवरी। निखिल सिद्धार्थ अपनी आगामी फिल्म “स्वयंभू” को लेकर बेहद उत्साहित हैं, जो एक भारतीय सम्राट के जीवन पर आधारित है।
विविध शैलियों की फिल्मों के लिए पहचाने जाने वाले निखिल कहते हैं, “मैं ऐसी कहानियों की ओर तुरंत आकर्षित हो जाता हूँ, जो भारतीय इतिहास के पन्नों में कहीं खो गई हैं। यहां तक कि ‘कार्तिकेय 2’ भी भगवान कृष्ण से जुड़ी एक ऐसी ही कहानी थी। बचपन में मुझे ‘अमर चित्र कथा’ श्रृंखला और अपने दादा-दादी से सुनी कहानियां बहुत पसंद थीं। उनका एक अलग ही आकर्षण था।”
“स्वयंभू” कृष्णन रमन के जीवन से प्रेरित है, जिन्होंने चोल सम्राट राजराजा चोल प्रथम के अधीन सेवा की थी। निखिल बताते हैं, “उन्हें वह पहचान नहीं मिली जिसके वे हकदार थे। एक युवा के रूप में उन्हें ऐसी स्थिति में डाल दिया गया था जिससे एक साम्राज्य का भाग्य तय होना था। जैसे ही मैंने भरत कृष्णमाचारी की पटकथा पढ़ी, मुझे पता था कि मुझे इसका हिस्सा बनना है। कृष्णन रमन ने इंडोनेशिया और मॉरीशस जैसे देशों की यात्रा की थी, जो आज भी हमारी प्राचीन संस्कृति का पालन करते हैं। हमारे निर्देशक ने उन पर व्यापक शोध किया है।”
‘कांतारा’, ‘हनु-मान’ और ‘कार्तिकेय 2’ जैसी फिल्मों की सफलता के बाद, पौराणिक कथाएं भारत की सबसे लोकप्रिय शैलियों में से एक बन गयी हैं। तेलुगु फिल्म उद्योग की कई इसी शैली की फिल्में प्रदर्शित होने वाली हैं, जिनमें एस.एस. राजामौली की “वाराणसी” भी शामिल है।
निखिल संख्या के बजाय गुणवत्ता पर जोर देते हैं। उनका कहना है “पौराणिक कथाओं पर कई फिल्में बनाना तब तक ठीक है जब तक कि वे केवल पैसा कमाने का जरिया न हों। दिव्यता पर आधारित फिल्मों को अच्छी तरह से बनाया जाना चाहिए। ‘स्वयंभू’ एक कालखंड (पीरियड) फिल्म है, जैसे ‘गेम ऑफ थ्रोन्स’। यह 1,000 साल पहले की वास्तविक घटनाओं, राजाओं, विजय और सत्ता के संघर्ष के बारे में है।”
‘कार्तिकेय 3’ के बारे में उन्होंने कहा, “चंदू मोंडेती और मैं काम शुरू करने से पहले एक ठोस कथानक चाहते थे। लोग एक फिल्म के सफल होने के बाद जल्दबाजी में उसके अगले भाग की घोषणा कर देते हैं, लेकिन अच्छी कहानियों में समय लगता है। जल्दबाजी वाला दृष्टिकोण उल्टा भी पड़ सकता है।”
करियर की कठिन शुरुआत के बावजूद, निखिल अपनी विषय-प्रधान फिल्मों के कारण एक भरोसेमंद सितारे बन गए हैं। वे कहते हैं, “मेरे पास जो है, मैं उससे खुश हूं। लोग कहते हैं कि वे पूरे परिवार के साथ मेरी फिल्में देखना पसंद करते हैं। मैं केवल एक प्रसिद्ध हस्ती बनने के बजाय ऐसी महान फिल्मों का हिस्सा बनना चाहता हूं जिन्हें याद रखा जाए। यह जानकर मेरा मन भर आता है कि दुनिया भर में लोग ‘कार्तिकेय 2’ पर चर्चा करते हैं। मैं अपने परिवार के साथ समय बिताता हूं और चकाचौंध से दूर रहता हूं। मैं थोड़ा शर्मीला हूं, और हालांकि लोग मुझे अपना प्रचार बढ़ाने की सलाह देते हैं, पर मैं अपनी वर्तमान स्थिति में संतुष्ट हूं।”
उत्तर बनाम दक्षिण फिल्म विवाद पर निखिल ने कहा, “लोग भाषा की परवाह किए बिना अच्छी फिल्मों का आनंद लेते हैं। ‘धुरंधर’ को तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में पसंद किया जा रहा है। मैं शाहरुख़ खान और सलमान खान को देखकर बड़ा हुआ हूं। रजनीकांत, प्रभास, अल्लू अर्जुन को उत्तर भारत में प्यार मिलता है। इंटरनेट पर दिखने वाली नकारात्मकता केवल उन शरारती तत्वों की वजह से है जो परेशानी चाहते हैं। मैं इस पर ध्यान नहीं देता।”
सियासी मियार की रीपोर्ट
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