ओला इलेक्ट्रिक के सीईओ भाविश अग्रवाल के खिलाफ जमानती वारंट जारी, खराब सर्विस और ग्राहक का स्कूटर गायब होने पर उपभोक्ता आयोग का सख्त एक्शन

गोवा, 19 फरवरी। ओला इलेक्ट्रिक के संस्थापक भाविश अग्रवाल की कानूनी मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। दक्षिण गोवा जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक ग्राहक की शिकायत पर कड़ा रुख अपनाते हुए अग्रवाल के खिलाफ जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। पूरा मामला प्रीतिश चंद्रकांत घाड़ी से जुड़ा है, जिन्होंने ₹1.47 लाख की ओला S1 प्रो बाइक खरीदी थी। तकनीकी खराबी के बाद जब उन्होंने स्कूटर सर्विस सेंटर को सौंपा, तो वह महीनों तक वापस नहीं मिला। कंपनी यह बताने में भी विफल रही कि ग्राहक की संपत्ति आखिर कहां है।
आयोग ने ओला इलेक्ट्रिक के रवैये को “अत्यंत गैर-जिम्मेदाराना और उदासीन” करार देते हुए बेंगलुरु पुलिस को वारंट तामील करने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान पाया गया कि कंपनी ने ग्राहक से पूरी राशि वसूलने के बाद उसे अधर में छोड़ दिया। भाविश अग्रवाल को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए समन जारी किया गया था, लेकिन उनकी अनुपस्थिति के बाद आयोग ने यह सख्त कदम उठाया। अब अग्रवाल को राहत पाने के लिए स्कूटर की कीमत के बराबर मुचलका भरना होगा और 23 फरवरी को व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा।
भाविश अग्रवाल के लिए यह समय काफी चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि वे पहले से ही बेंगलुरु में एक कर्मचारी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले का सामना कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, सोशल मीडिया पर ओला की गिरती सर्विस क्वालिटी और उत्पादों की खराबी को लेकर ग्राहकों का भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। यह वारंट कंपनी की साख पर एक बड़ा धब्बा माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि 23 फरवरी की सुनवाई में कंपनी ग्राहक के ‘लापता’ स्कूटर और सेवा में हुई इस भारी चूक पर क्या स्पष्टीकरण देती है।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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