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देश के बैंकिंग सेक्टर में SBI का ऐतिहासिक कदम, साल 2030 तक बैंक पोर्टफोलियो का 10% हिस्सा होगा ‘ग्रीन लोन’, पर्यावरण के अनुकूल प्रोजेक्ट्स पर रहेगा फोकस

देश के बैंकिंग सेक्टर में SBI का ऐतिहासिक कदम, साल 2030 तक बैंक पोर्टफोलियो का 10% हिस्सा होगा ‘ग्रीन लोन’, पर्यावरण के अनुकूल प्रोजेक्ट्स पर रहेगा फोकस

हैदराबाद, 23 फरवरी । देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने बैंकिंग जगत में स्थिरता और सस्टेनेबिलिटी को लेकर एक क्रांतिकारी योजना पेश की है। बैंक ने लक्ष्य निर्धारित किया है कि वर्ष 2030 तक वह अपने कुल घरेलू ऋण पोर्टफोलियो का $7.5\%$ से $10\%$ हिस्सा ‘ग्रीन एडवांस’ यानी पर्यावरण के अनुकूल परियोजनाओं के लिए आरक्षित करेगा। वर्तमान में यह हिस्सेदारी मात्र $1.56\%$ है, जिसे अगले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ाने की तैयारी है। इसके लिए बैंक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष ‘ग्रीन लाइन्स ऑफ क्रेडिट’ के जरिए पूंजी जुटाएगा।

अपनी इस रणनीति को अमली जामा पहनाने के लिए SBI ने ‘चक्र’ (CHAKRA) नामक एक ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ लॉन्च किया है। यह केंद्र विशेष रूप से ‘सनराइज सेक्टर्स’ जैसे कि रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और कार्बन न्यूट्रैलिटी से जुड़े प्रोजेक्ट्स की वित्तीय जरूरतों को पूरा करेगा। बैंक का उद्देश्य न केवल ऋण देना है, बल्कि अपनी कार्यप्रणाली को भी पूरी तरह प्रदूषण मुक्त बनाना है। इसी कड़ी में बैंक ने 2030 तक कार्बन न्यूट्रल बनने और 2055 तक पूर्ण ‘नेट जीरो’ (Net Zero) का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।

स्थिरता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करने के लिए हाल ही में मुंबई में ‘SBI ग्रीन मैराथन’ के छठे संस्करण का आयोजन किया गया। ‘रन फॉर ए ग्रीनर इंडिया’ थीम पर आधारित इस दौड़ में 10,000 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। बैंक के एमडी रामा मोहन राव अमारा ने इस अवसर पर कहा कि स्थिरता अब SBI के मूल उद्देश्यों का हिस्सा है। बैंक चाहता है कि आम नागरिक भी ‘मिशन लाइफ’ (Mission LiFE) से जुड़ें और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।

सियासी मियार की रीपोर्ट