अमेरिका ने श्रीलंका को धमकाया कहा- डूबे हुए ईरानी युद्धपोत के नौसैनिकों को वापस न भेजे

कोलंबो, 08 मार्च। अमेरिका पूरी दुनिया पर अपना न केवल हुक्म चला रहा है बल्कि डराने और धमकाने से भी पीछे नहीं हट रहा है। इसी नीति के चलते हिंद महासागर में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिका अब श्रीलंका सरकार पर कूटनीतिक दबाव बना रहा है कि वह हिरासत में लिए गए ईरानी नौसैनिकों और युद्धपोत आईआरआईएस देना के जीवित बचे सदस्यों को ईरान वापस न भेजे। यह विवाद तब शुरू हुआ जब बुधवार को एक अमेरिकी पनडुब्बी ने श्रीलंका के दक्षिणी बंदरगाह शहर गाले से लगभग 19 समुद्री मील दूर ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस देना को टॉरपीडो से हमला कर डुबा दिया। इस घातक कार्रवाई में 100 से अधिक ईरानी नौसैनिकों की मौत हो गई, जबकि 32 को सुरक्षित बचा लिया गया।
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस हमले को शांत मौत का नाम दिया है, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अपनी तरह की पहली बड़ी अमेरिकी कार्रवाई मानी जा रही है। गौरतलब है कि देना युद्धपोत पिछले महीने बंगाल की खाड़ी में आयोजित एक नौसैनिक अभ्यास में भाग लेकर लौट रहा था। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि स्ट्राइक के समय युद्धपोत पूरी तरह हथियारों से लैस था और बिना किसी पूर्व चेतावनी के हमला किया गया। इस घटना के बाद श्रीलंका के विशेष आर्थिक क्षेत्र में फंसे एक अन्य ईरानी सहायक पोत आईआरआईएस बुशहर के 208 चालक दल के सदस्यों को भी श्रीलंकाई अधिकारियों ने उतारा है। राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने मानवीय आधार पर इन्हें शरण देने की बात कही है, लेकिन अमेरिकी कूटनीतिक केबल्स से पता चलता है कि वाशिंगटन इन नौसैनिकों की रिहाई के पक्ष में नहीं है। कोलंबो में अमेरिकी दूतावास की प्रभारी जेन हॉवेल ने स्पष्ट किया है कि जब तक मौजूदा संघर्ष जारी है, इन बंदियों को वापस ईरान नहीं भेजा जाना चाहिए ताकि ईरान इनका इस्तेमाल प्रोपेगेंडा के लिए न कर सके।इस मामले में इजरायली कूटनीति भी सक्रिय नजर आ रही है। रिपोर्टों के अनुसार, इजरायली राजदूत ने अमेरिका से यह भी जानने की कोशिश की है कि क्या इन ईरानी नौसैनिकों को पाला बदलने (दल-बदल) के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। दूसरी ओर, ईरान ने अपने मारे गए नौसैनिकों के शवों को वापस भेजने की आधिकारिक मांग की है। हालांकि श्रीलंका के स्वास्थ्य और जनसंचार उप मंत्री हंसका विजेमुनि ने मदद का आश्वासन दिया है, लेकिन शवों की वापसी के लिए फिलहाल कोई समय-सीमा तय नहीं की गई है।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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