निवेश की दुनिया में कदम रखने से पहले तैयार करें अपना ‘इमरजेंसी फंड’, वित्तीय विशेषज्ञों ने दी चेतावनी, आर्थिक संकट से बचने के लिए सुरक्षा चक्र है अनिवार्य
नया वित्तीय वर्ष शुरू होने से पहले बाजार विशेषज्ञ निवेशकों को एक महत्वपूर्ण सलाह दे रहे हैं। शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने की होड़ के बीच ‘इमरजेंसी फंड’ बनाना सबसे अनिवार्य कदम है। यह एक ऐसा आरक्षित कोष है, जिसे केवल नौकरी छूटने, अचानक बीमारी या किसी अप्रत्याशित संकट के समय इस्तेमाल के लिए अलग रखा जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि निवेश से पहले सुरक्षा घेरा तैयार न होने पर, आपात स्थिति में आपको अपने लॉन्ग टर्म निवेश को घाटे में बेचना पड़ सकता है, जिससे आपकी जमा पूंजी डूबने का खतरा रहता है।
एक आदर्श इमरजेंसी फंड आपके कम से कम तीन से छह महीने के अनिवार्य खर्चों (जैसे घर का किराया, ईएमआई, राशन और बच्चों की फीस) के बराबर होना चाहिए। उदाहरण के तौर पर, यदि आपका मासिक खर्च 40,000 रुपये है, तो आपके पास 1.2 लाख से 2.4 लाख रुपये का बैकअप होना चाहिए। निजी क्षेत्र या फ्रीलांसिंग में काम करने वालों के लिए यह फंड 9 महीने तक का हो सकता है। फंड की गणना करते समय बाहर खाना, घूमना और ओटीटी सब्सक्रिप्शन जैसे गैर-जरूरी खर्चों को शामिल न करें, ताकि संकट के समय आपकी बुनियादी जरूरतें प्रभावित न हों।
इमरजेंसी फंड का मुख्य उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि ‘तरलता’ (Liquidity) सुनिश्चित करना है। इस पैसे को कभी भी शेयर बाजार या रियल एस्टेट जैसी जोखिम भरी जगहों पर न रखें। इसके बजाय बचत खाता, लिक्विड म्यूचुअल फंड या शॉर्ट टर्म बैंक एफडी बेहतर विकल्प हैं, जहाँ से 24 से 48 घंटों के भीतर पैसा निकाला जा सके। युवा पेशेवरों को अपनी मासिक आय का 10-15% हिस्सा अलग रखकर इसकी शुरुआत करनी चाहिए। याद रखें, वित्तीय नियोजन का पहला मंत्र है— “पहले सुरक्षा, फिर निवेश”, ताकि आप कभी कर्ज के जाल में न फंसें।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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