राष्ट्रपति के संवैधानिक पद के अनुरूप व्यवस्थाओं में हुई चूक दुर्भाग्यपूर्ण: उपराष्ट्रपति

नई दिल्ली, 08 मार्च । पश्चिम बंगाल के दौरे पर गईं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कार्यक्रम स्थल और मुख्यमंत्री समेत मंत्रियों की गैरहाजिरी पर सवाल उठाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे राष्ट्रपति का अपमान बताया तो वहीं उपराष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रपति के संवैधानिक पद के अनुरूप व्यवस्थाओं में हुई कोई भी चूक दुर्भाग्यपूर्ण है।
उपराष्ट्रपति की तरफ से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया गया, जिसमें लिखा गया कि राष्ट्रपति का पद हमारे गणतंत्र का सर्वोच्च संवैधानिक पद है और इसे हमेशा वह गरिमा, प्रोटोकॉल और सम्मान मिलना चाहिए जिसका यह हकदार है।
उन्होंने आगे लिखा कि पश्चिम बंगाल में आज राष्ट्रपति के संवैधानिक पद के अनुरूप व्यवस्थाओं में हुई कोई भी चूक दुर्भाग्यपूर्ण है। राष्ट्रपति के पद की गरिमा को हमेशा बनाए रखना चाहिए और राष्ट्र के सर्वोच्च पद को उचित सम्मान देना चाहिए।
इस घटनाक्रम को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा कि यह शर्मनाक और अभूतपूर्व है। लोकतंत्र और आदिवासी समुदायों के सशक्तिकरण में विश्वास रखने वाला हर व्यक्ति निराश है। स्वयं आदिवासी समुदाय से आने वाली राष्ट्रपति द्वारा व्यक्त की गई पीड़ा और दुख ने भारत की जनता के मन में अपार दुख पैदा कर दिया है।
प्रधानमंत्री ने इस विवाद के लिए सीधे तौर पर पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार को दोषी ठहराया और कहा कि राष्ट्रपति के प्रति दिखाई गई बेइज्जती के लिए राज्य प्रशासन जिम्मेदार है।
उन्होंने कहा, “पश्चिम बंगाल की टीएमसी सरकार ने सारी हदें पार कर दी हैं। राष्ट्रपति के इस अपमान के लिए उनका प्रशासन जिम्मेदार है। यह भी उतना ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि पश्चिम बंगाल सरकार संथाल संस्कृति जैसे महत्वपूर्ण विषय को इतनी लापरवाही से ले रही है।”
हालांकि, टीएमसी की तरफ से इन आरोपों को खारिज कर दिया गया है। इसके साथ ही भाजपा पर राजनीति करने का आरोप लगाया गया है।
सियासी मियार की रीपोर्ट
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